आंदोलन हुआ तेज, अधिवक्ता 20 नवंबर को करेंगे चक्का जाम

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रैन बसेरा निर्माण पर सरकार का फैसला गलत-गोदियाल

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। राजधानी देहरादून में अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण की मांग को लेकर जारी आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है।
बार एसोसिएशन देहरादून ने स्पष्ट कहा है कि उत्तराखंड सरकार अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण से संबंधित किसी भी नीति में सहयोग नहीं कर रही है, जिस कारण सरकार के खिलाफ अधिवक्ताओं का रोष कल 20 नवंबर को भी जारी रहेगा।

बार एसोसिएशन ने सभी अधिवक्ताओं से अपील की है कि वह 20 नवंबर को प्रात: 10 बजे विधि भवन के हाल में एकत्र हों, जिसके बाद 10.30 बजे हरिद्वार रोड स्थित नए न्यायालय परिसर के बाहर सांकेतिक चक्काजाम कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। एसोसिएशन ने कहा है कि यह मुद्दा अधिवक्ताओं के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सभी अधिवक्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य है। इसी कारण 20 नवंबर को वकील न्यायालय व कार्यालयों से पूर्ण रूप से विरत रहेंगे। बस्ते, टाइपिंग, स्टाम्प वेंडर और रजिस्ट्रार कार्यालय भी पूर्णत: बंद रहेंगे। इस बीच पुराने न्यायालय परिसर में प्रस्तावित रैन बसेरा निर्माण के विरोध में चल रहे इस आंदोलन को कांग्रेस का खुला समर्थन मिला है।

बुधवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल रेसकोर्स स्थित न्यायालय परिसर पहुंचे और अधिवक्ताओं के धरने में शामिल हुए। गोदियाल ने कहा कि सरकार का कोर्ट परिसर के बीच रैन बसेरा बनाने का निर्णय उचित नहीं है, जबकि शहर में इसके लिए कई अन्य स्थान उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यों के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। गोदियाल ने वकीलों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सरकार पर जनहित की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उपनल कर्मचारियों और अन्य लंबित मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना भी अधिवक्ताओं के धरने पर पहुंचे और लगभग दो घंटे तक उनके साथ बैठे। धस्माना ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वकीलों को न्यायालय परिसर बनने के बाद भी चैंबर नहीं दिए गए और उन्हें सड़क पर बैठकर काम करने की मजबूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि पुराने परिसर की 65 बीघा भूमि में से मात्र 5 बीघा चैंबरों के लिए देना समझ से बाहर है। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने परिसर के एक हिस्से को वकीलों के लिए आरक्षित किया जाए और नए-पुराने दोनों परिसरों को अंडरपास से जोड़ा जाए।
धस्माना ने स्पष्ट कहा कि अधिवक्ताओं की सभी मांगें न्यायोचित हैं और सरकार को चैंबर निर्माण कर उन्हें आवंटित करना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन को हर स्तर पर समर्थन देगी। धरने में बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, सचिव राजेंद्र बिष्ट, कांग्रेस नेता संदीप चमोली, हीरा सिंह बिष्ट, दिनेश कौशल, एडवोकेट विपुल नौटियाल सहित अनेक अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने अधिवक्ता आंदोलन को न्यायोचित करार दिया

रैन बसेरा निर्माण पर सरकार का फैसला गलत-गोदियाल
देहरादून। पुराने न्यायालय परिसर में प्रस्तावित रैन बसेरा निर्माण के विरोध में अधिवक्ताओं के चल रहे आंदोलन को कांग्रेस ने खुला समर्थन दिया है। बुधवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल रेसकोर्स स्थित न्यायालय परिसर पहुंचे और अधिवक्ताओं के धरने में शामिल हुए।

गोदियाल ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि सरकार कोर्ट परिसर के बीच रैन बसेरा बनाने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि देहरादून में और भी कई स्थान उपलब्ध हैं, लेकिन कोर्ट के दो परिसरों के बीच की जमीन ही क्यों चुनी गई? आने वाली पीढ़ियों के लिए न्यायिक कार्यों की पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। रैन बसेरा कहीं भी बनाया जा सकता है, लेकिन वकीलों के चैम्बर दो किलोमीटर दूर नहीं बनाए जा सकते।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में वकीलों की अहम भूमिका रही है। आंदोलन के दौरान वकीलों की पहली पीढ़ी ने निशुल्क पैरवी कर आंदोलनकारियों की मदद की, जिसके लिए पूरा प्रदेश आज भी उनका ऋणी है।

उन्होंने सरकार पर जनहित की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि उपनल कर्मचारी भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। यह सरकार की हठधर्मिता को दर्शाता है।

गोदियाल ने कहा कि वकीलों की समस्या सरकार द्वारा पैदा की गई है, इसलिए उसे ही समाधान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अधिवक्ताओं की मांगों पर सरकार तत्काल निर्णय लेकर रैन बसेरा निर्माण का प्रस्ताव वापस ले।

धरने में बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, प्रवक्ता संदीप चमोली, सचिव राजेंद्र सिंह बिष्ट, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, सूर्यकांत धस्माना, डॉ. प्रतिमा सिंह, सुजाता पॉल, राजेश चमोली, नितिन बिष्ट सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

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