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“सिलक्यारा विजय अभियान” दृढ़ इच्छाशक्ति, नेतृत्व और वैज्ञानिक दक्षता का प्रतीक
विश्व आपदा प्रबंधन एवं राज्य विज्ञान सम्मेलन–2025
अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून । हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान रडार स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य का चेतावनी तंत्र और अधिक मजबूत होगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने “सिलक्यारा विजय अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नेतृत्व और वैज्ञानिक दक्षता से किसी भी जटिल चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री यहां आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन और 20वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन–2025 में बोल रहे थे।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह
ने घोषणा की कि हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान राडार स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य का चेतावनी तंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने “सिलक्यारा विजय अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नेतृत्व और वैज्ञानिक दक्षता से किसी भी जटिल चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया जा सकता है।
अपने संबोधन में कहा कि इस विश्व आपदा सम्मेलन के आयोजन के लिए उत्तराखंड से बेहतर स्थान कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थानों के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि, देश-विदेश से आए वैज्ञानिक और शोधकर्ता जलवायु परिवर्तन तथा आपदा प्रबंधन संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव पूरे विश्व के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है। यहाँ की नदियाँ, ग्लेशियर और जैव विविधता पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से हिमालय का संतुलन प्रभावित हो रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम पैटर्न, तीव्र वर्षा, क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन की बढ़ती घटनाएँ चिंताजनक हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के बीच समन्वय आवश्यक है, और यह सम्मेलन उस दिशा में महत्वपूर्ण सेतु सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए “4P मंत्र—Predict, Prevent, Prepare और Protect” के आधार पर 10 सूत्रीय एजेंडा लागू किया गया है।
सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान इसकी उत्कृष्ट मिसाल है, जहाँ 17 दिनों के प्रयासों के बाद 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाया गया। इस अभियान के बाद राज्य में राहत एवं बचाव से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकों, जोखिम आकलन, एआई आधारित चेतावनी प्रणाली और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण कार्यक्रम और जनभागीदारी आधारित प्रयास जारी हैं। रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित करने, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेंसर आधारित झील मॉनिटरिंग पर कार्य किया जा रहा है। अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ किया जा रहा है। पौधारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा सहित हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु स्प्रिंग रीजन्यूवेशन अथॉरिटी (SARA) का गठन किया गया है, जिसके अंतर्गत पारंपरिक जल स्रोतों का चिन्हीकरण और पुनर्जीवन किया जा रहा है। राज्य में “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” लागू किया गया है, जिससे प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन में उल्लेखनीय सफलता मिली है और अब तक हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है। इन नवाचारों के परिणामस्वरूप उत्तराखंड को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माँ के रूप में पूजने की परंपरा रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति आस्था, परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को साथ लेकर आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार जैव-विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखने के अपने ‘विकल्प-रहित संकल्प’ के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में विश्व को नई दिशा प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाली महिला वैज्ञानिकों को सम्मानित किया।
राज्यभर के विभिन्न शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों से चयनित वैज्ञानिकों को “Young Women Scientist Achievement Award–2025” और “UCOST Young Women Scientist Excellence Award” प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक आधारित नवाचार आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा महिला वैज्ञानिकों का शोध कार्य न केवल राज्य बल्कि देश और विश्व के लिए प्रेरणादायक है।
सम्मानित वैज्ञानिकों में यंग वीमेन साइंटिस्ट अचीवमेंट अवार्ड–2025 (45 वर्ष तक) के अंतर्गत डॉ. अंकिता राजपूत, डॉ. गरिमा पुनेठा, डॉ. ममता आर्या, डॉ. हर्षित पंत, डॉ. प्रियंका शर्मा और डॉ. प्रियंका पांडे शामिल रहीं। वहीं यूकॉस्ट यंग वीमेन साइंटिस्ट एक्सीलेंस अवार्ड (30 वर्ष तक) के अंतर्गत डॉ. प्रियंका उनियाल, पलक कंसल, राधिका खन्ना, स्तुति आर्या और देवयानी मुंगल को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, सचिव नितेश झा, यूकॉस्ट महानिदेशक दुर्गेश पंत, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के चेयरमैन कमल घनशाला, विभिन्न देशों के राजदूत, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, देश-विदेश से आए शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ तथा ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य और छात्र उपस्थित रहे।
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