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गिरधारी ने मंत्री पत्नी पर करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित करने का लगाया था आरोप
25 दिन की फरारी के बाद पकड़े गए गिरधारी साहू
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पिछले तीन हफ्तों से भूचाल ला रहा हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद अब एक बड़े कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को देहरादून पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद एसआईटी टीम उन्हें लेकर देहरादून के लिए रवाना हो गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, साहू से एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर विस्तार से पूछताछ की जाएगी। पुलिस आज दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरफ्तारी और जांच से जुड़े अहम खुलासे कर सकती है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।
25 दिन से चल रही थी तलाश
पुलिस के अनुसार, साहू की गिरफ्तारी के लिए करीब 25 दिनों से लगातार दबिश दी जा रही थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह पुलिस की पकड़ से बाहर थे।
जांच में सामने आया कि उनका मोबाइल फोन बंद था और वह लगातार ठिकाने बदल रहे थे। बीच में उनके नेपाल भाग जाने की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन आखिरकार उन्हें झांसी में पकड़ा गया।
एसआईटी की अध्यक्षता एसपी देहात जया बलोनी कर रही हैं। जांच के दौरान एसआईटी ने साहू के कई करीबियों से पूछताछ की और बरेली, हल्द्वानी, देहरादून समेत कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी।

15 अक्टूबर को दर्ज हुई थी एफआईआर
इस पूरे मामले की शुरुआत 15 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मंत्री ने उसी दिन एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने पति पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं-
- पहली शादी छिपाकर विवाह का आरोप
शिकायत के अनुसार, दोनों की शादी 6 जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। मंत्री का आरोप है कि शादी के समय गिरधारी साहू ने खुद को अविवाहित बताया था, जबकि वह पहले से विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे। - मारपीट और उत्पीड़न का आरोप
मंत्री का आरोप है कि पति के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया गया। - जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि गिरधारी साहू ने मंत्री के सरकारी आवास पर स्टाफ की मौजूदगी में उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। - कंपनियों से हटाने और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
मंत्री का आरोप है कि कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उन्हें निदेशक पद से हटाने का प्रयास किया गया। उनके मुताबिक, संबंधित दस्तावेजों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जबकि उन्होंने न तो कोई इस्तीफा दिया और न ही निदेशक पद छोड़ने की सहमति दी थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मंत्री की ओर से यह भी दावा किया गया कि गिरधारी साहू ने उन्हें सभी कंपनियों से हटा दिया और उनके 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए।
- हत्या की साजिश का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मंत्री को एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली, जिसमें उनके पति किसी अन्य महिला के साथ मिलकर उनकी और उनके बच्चों की हत्या की साजिश रच रहे थे।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी दर्ज होने का उल्लेख है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी अभी आरोप हैं। कोर्ट में अभी इनमें से कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। जांच और ट्रायल के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
गिरधारी साहू का पलटवार: 210 करोड़ की संपत्ति का आरोप
मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी वीडियो जारी कर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि जिस ऑडियो के आधार पर उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह एआई से तैयार किया गया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले की जांच करने की अपील की थी। साथ ही उन्होंने मंत्री रेखा आर्या पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और कहा था कि उनके पास लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध-बेनामी संपत्ति है। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
ये आरोप भी अभी गिरधारी साहू के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच-पुष्टि नहीं हुई है।
कोर्ट में हार, फिर गैर-जमानती वारंट
गिरफ्तारी से बचने के लिए गिरधारी साहू ने कानूनी लड़ाई के कई स्तर आजमाए, लेकिन हर जगह उन्हें झटका लगा।
पहले 18 अक्टूबर को देहरादून की एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद गिरधारी साहू ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी। 30 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल कोई अंतरिम राहत नहीं दी। इसके बाद 4 नवंबर को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले के आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 22 साल का वैवाहिक संबंध होने मात्र से बाद में कथित तौर पर हुए अपराधों या क्रूरता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। ऑडियो रिकॉर्डिंग और फर्जी दस्तावेजों की सत्यता जांच तथा विचारण का विषय है।
एसआईटी ने पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए गिरधारी साहू को तीन बार नोटिस जारी किया था, लेकिन वह पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत से उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट हासिल किया गया।
50 मुकदमों का आपराधिक इतिहास?
पुलिस जांच में साहू का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के बरेली और उत्तराखंड में करीब 50 मुकदमे दर्ज हैं और वह पहले भी जेल जा चुके हैं।
एसआईटी अब इन पुराने मुकदमों, कंपनियों के दस्तावेजों, शेयर ट्रांसफर, ऑडियो की फोरेंसिक जांच और दोनों पक्षों के वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
अब आगे क्या?
गिरफ्तारी के बाद साहू को देहरादून की अदालत में पेश किया जाएगा। एसआईटी उनसे एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों पर अलग-अलग पूछताछ करेगी। पुलिस आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरफ्तारी की परिस्थितियों, फरारी के दौरान उनकी गतिविधियों और जांच में मिले साक्ष्यों के बारे में जानकारी दे सकती है।
अगर पुलिस को रिमांड मिलती है, तो कंपनियों के दस्तावेज और ऑडियो से जुड़ी जांच आगे बढ़ेगी।
फिलहाल, इस मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ महिला एवं बाल विकास मंत्री ने अपने ही पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी तरफ पति ने मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। अब सबकी नजरें पुलिस की जांच और अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।
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