पतंजलि का गाय घी जांच में फेल

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कोर्ट ने लगाया 1.40 लाख रुपये का जुर्माना

पिथौरागढ़ में 2020 में लिए गए नमूने दोनों लैबों में पाए गए मानकों से नीचे

स्वास्थ्य पर पड़ सकते थे दुष्प्रभाव

अविकल उत्तराखण्ड

पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद का गाय का घी गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है।

चार साल पुराने मामले में न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम पिथौरागढ़ के न्यायालय ने गुरुवार को कंपनी और संबंधित कारोबारियों पर कुल 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। घी के नमूने वर्ष 2020 में लिए गए थे, जिनकी जांच राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर असफल रही।

अधिकारियों का कहना है कि मानकों से नीचे गुणवत्ता वाले इस घी के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते थे। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा ने बताया कि नमूनों की जांच रुद्रपुर की राज्य प्रयोगशाला और उसके बाद गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला में कराई गई। दोनों जांचों में घी मानकों पर खरा नहीं उतरा। विभागीय अधिकारियों ने सबूतों सहित पूरा मामला अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

दो साल तक कंपनी की प्रतिक्रिया नहीं, अपील पर दोबारा जांच भी रही फेल

अधिकारियों के अनुसार पतंजलि आयुर्वेद को 2021 में पहली रिपोर्ट की सूचना दे दी गई थी, लेकिन कंपनी की ओर से काफी समय तक कोई जवाब नहीं आया।

बाद में 15 अक्टूबर 2021 को पतंजलि ने नमूने की दोबारा जांच कराने की अपील की और सेंट्रल लैब जांच के लिए 5,000 रुपये निर्धारित शुल्क भी जमा कराया। 16 अक्टूबर 2021 को राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला गाजियाबाद में पुन: जांच कराई गई, लेकिन वहां भी घी मानक पर खरा नहीं उतर सका। 26 नवंबर 2021 को आई रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से गंभीर त्रुटियां पाई गईं। इसके बाद विस्तृत अध्ययन और सुनवाई के उपरांत मामला अदालत में चला।

कहां से लिया गया था नमूना?

20 अक्टूबर 2020 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने पिथौरागढ़ के कासनी स्थित करन जनरल स्टोर से पतंजलि गाय के घी का नमूना लिया था। रुटीन चेकिंग के दौरान उठाए गए इस सैंपल की जांच में कई पैरामीटर मानक से कम पाए गए।

कितनी कंपनियों पर लगा कितना जुर्माना?

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता) : 1,00,000 रुपये
ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रिब्यूटर) : 25,000 रुपये
करन जनरल स्टोर (विक्रेता) : 15,000 रुपये
कुल जुर्माना: 1,40,000 रुपये

कब-कब क्या हुआ?

20 अक्टूबर 2020 : कासनी से घी का नमूना लिया गया
2021 (रुद्रपुर लैब रिपोर्ट) : घी मानकों पर फेल
15 अक्टूबर 2021 : पतंजलि ने दोबारा जांच की अपील की
16 अक्टूबर 2021 : गाजियाबाद राष्ट्रीय लैब में दूसरी जांच
26 नवंबर 2021 : दूसरी रिपोर्ट में भी घी असफल
17 फरवरी 2022 : मामला कोर्ट में प्रस्तुत
27 नवंबर 2025 : अदालत ने सुनाया फैसला, जुर्माना लगाया

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