वनन्तरा रिसॉर्ट के निकट आंदोलनकारियों ने किया प्रदर्शन

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30 दिसंबर को देहरादून में सर्वदलीय बैठक,पूर्व सैनिक भी हुए सक्रिय

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VIP सहित अन्य संलिप्त लोगों को फांसी देने की मांग

अविकल उत्तराखंड

ऋषिकेश। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग वनन्तरा रिजॉर्ट में एकत्रित हुए। और जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

जैसे-जैसे इस जघन्य हत्याकांड में नए-नए VIP नामों और चर्चित चेहरे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे जनता का आक्रोश भी तेज होता जा रहा है। दून में पूर्व सैनिकों ने भी बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई।

आक्रोश को देखते हुए प्रशासन द्वारा वनन्तरा क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कार्यक्रम के दौरान आक्रोशित भीड़ और पुलिस बल के बीच वनन्तरा रिसॉर्ट की ओर जाने को लेकर जद्दोजहद की स्थिति भी बनी। इसी दौरान मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया पुलिस बल से उलझते हुए नजर आए और उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा, तब तक जनता का यह आंदोलन जारी रहेगा।

मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि सत्ता–संरक्षण में पनपे अपराध तंत्र का परिणाम है। जब तक VIP चेहरों सहित सभी संलिप्त लोगों को सार्वजनिक रूप से कटघरे में लाकर कठोरतम सजा नहीं दी जाती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। पुलिस की बैरिकेडिंग, दबाव और दमन से जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। अब उत्तराखंड की जनता ने ठान लिया है कि दोषियों को फांसी तक पहुँचाकर ही दम लिया जाएगा।

सभा के दौरान संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष अब निर्णायक चरण में है। इसी क्रम में 30 दिसंबर को देहरादून में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनआंदोलनों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि एकजुट होकर अंकिता के दोषियों को कटघरे में लाने की ठोस रणनीति बनाई जा सके ।

संघर्ष समिति की महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका कुसुम जोशी ने कहा कि आज अपनी ही भूमि में हम अपनी ही पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर आने को मजबूर है। सत्ता पक्ष अपनी सत्ता में इतनी मदहोश है कि अपने ही लोगों को बचाने के लिए देवभूमि का तिरस्कार कर रही है।

मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिमांशु रावत ने कहा कि भाजपा सरकार शुरू से ही वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है परन्तु अंकिता दैवीय रूप में आकर बीजेपी को बेनकाब कर रही है l उत्तराखंड की जनता अंकिता को न्याय दिलाने के लिए वचनबद्ध है l

संघर्ष समिति के यमकेश्वर प्रभारी सुदेश भट्ट ने कहा कि जिस सरकार को वीआईपी की जांच करनी चाहिए वह खुद वीआईपी का बचाव करते नजर आ रही है । अगर दुष्यंत गौतम का नाम कथित वीआईपी के तौर पर सामने आ रहा है तो इस मामले की पूरी सीबीआई जांच होनी चाहिये ।

पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने कहा कि दुष्यंत गौतम को जांच के लिए तत्काल बुलाना चाहिए और उत्तराखंड सरकार को पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो ।

जिला पंचायत सदस्य पुष्प रावत ने कहा है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी वीआईपी को सजा न होना दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार महिला विरोधी सरकार है । जल्द ही महिलाओं के नेतृत्व में अंकिता को न्याय दिलाने के लिए एक बड़ा आंदोलन शुरू होगा ।

संघर्ष समिति के राकेश नेगी और प्रमोद काला ने कहा कि अंकिता भंडारी के न्याय की लड़ाई को अब प्रदेश स्तर पर लड़ा जाएगा । वीआईपी को फांसी से कम कुछ भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ।

संजय सिलस्वाल, विकास रयाल एवं ऊषा डोभाल ने जनगीत प्रस्तुत कर जनता के बीच एक सशक्त जनसंदेश देने का प्रयास किया। जनगीतों के माध्यम से अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और सत्ता–संरक्षण के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई ।
प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि ‘गट्टू’ VIP सहित सभी संलिप्त लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं,
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, और अंकिता भंडारी की हत्या में दोषी पाए गए सभी लोगों को फांसी की सजा दी जाए।
इस दौरान बनन्तरा में अनेक सामाजिक, राजनीतिक और जन आंदोलन से जुड़े चेहरे उपस्थित रहे।

ऋषिकेश महापौर के पूर्व प्रत्याशी दिनेश चंद मास्टर, संजय सिलस्वाल, मनोज कोठियाल, सुधीर राय रावत, हिमांशु पंवार, पहाड़ स्वाभिमान सेना के अध्यक्ष कपिल रावत, पंकज उनियाल प्रशांत कांडपाल, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के देहरादून महासचिव विपिन नेगी, आकांक्षा नेगी, दीपशिखा नेगी, शीतल नेगी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि देवभूमि की आत्मा पर हमला है, और यदि सत्ता तथा प्रशासन ने अब भी दोषियों को बचाने का प्रयास किया, तो यह जन आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि अब नाम छुपाने की राजनीति नहीं चलेगी। VIP चाहे कितना भी बड़ा नाम हो,उसको फांसी तक पहुंचाना ही जनता का संकल्प है ।

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