44 FIR दर्ज, अब सलाखों के पीछे गिरधारी; जानिए गिरफ्तारी की पूरी कहानी !

44 FIR दर्ज, अब सलाखों के पीछे गिरधारी; जानिए गिरफ्तारी की पूरी कहानी !
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आरोप है कि गिरधारी और उसके भतीजे ने मिलकर रेखा आर्य के फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और इनके आधार पर उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया। बाद में सतेंद्र को इन कंपनियों में निदेशक बना दिया गया।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े प्रकरण में मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू और उसके भतीजे सतेंद्र राठौर तक पहुंचने के लिए पुलिस ने साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गठित नौ सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने ऑडियो क्लिप से लेकर गवाहों के बयान और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की।

 

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया। इस मामले में गिरधारी के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर एक्ट समेत 44 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी भी पुलिस को मिली है।

एसएसपी के निर्देश पर एसपी ग्रामीण के पर्यवेक्षण में गठित एसआईटी ने जांच के दौरान संबंधित ऑडियो क्लिप कब्जे में ली। इसके साथ ही मामले से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज किए और कंपनी के दस्तावेजों की जांच की। पुलिस के मुताबिक, इन साक्ष्यों में गिरधारी लाल और उसके भतीजे सतेंद्र राठौर की भूमिका सामने आई।

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न अपराधों में 44 मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस की टीमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को गिरधारी को झांसी और सतेंद्र को बरेली के जोगी नवादा से गिरफ्तार करने में सफलता मिली। दोनों से पूछताछ कर एसआईटी मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य और तथ्यों की जानकारी जुटा रही है।

चार कंपनियों के दस्तावेजों की हुई पड़ताल
एसआईटी की जांच के दायरे में देवों के देव महादेव, बनखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल रहीं। जांच में सतेंद्र की भूमिका सामने आने के बाद उसका नाम भी प्राथमिकी में शामिल किया गया। पुलिस अब इन कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है। इन कंपनियों की मार्केट वैल्यू कितनी है टीम इसकी भी जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो इन कंपनियों की वैल्यू कई करोड़ रुपये है।

अब फॉरेंसिक जांच में आएगी तेजी
गिरधारी और उसके भतीजे सतेंद्र की गिरफ्तारी के बाद अब वायरल ऑडियो और हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच में भी तेजी आने की उम्मीद है। मंत्री रेखा आर्या ने जो वीडियो सामने रखा था अगले ही दिन उसे गिरधारी ने झूठा करार देते हुए कहा था कि ये एआई से तैयार किया गया है। ऐसे में एसआईटी इसको जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजने की तैयारी की पर सबसे बड़ी बाधा ये बनी कि आखिरकार आवाज गिरधारी की है या नहीं इसका मिलान कैसे होगा। अब गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद उसकी असली आवाज का सैंपल लिया जाएगा जिसे वायरल ऑडियो से मिलान के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। वहीं कूटरचित हस्ताक्षर के मामले में एसएसपी ने बताया कि वह हस्ताक्षर गिरधारी ने ही किए थे।

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