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अविकल उत्तराखंड
देहरादून । भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) अहमदाबाद के प्लेनेटरी साइंस डिवीजन के हेड श्री वरुण शील ने कहा कि अंतरिक्ष केवल शोध का क्षेत्र नहीं बल्कि मानवता की भावी प्रयोगशाला है, जहां आज की जिज्ञासाएं कल के सपनों और असीम संभावनाओं में रूपांतरित होती है।
वह आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। ‘चंद्रयान और उससे परे- भारत के अंतरिक्ष अभियान‘ विषय पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रमा और सूर्य पर हमारे मिशन सिर्फ विज्ञान की उपलब्धियां नहीं है बल्कि यह उस नए युग की दस्तक है जहां भारत अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी भूमिका निभाएगा। श्री वरुण शील ने अपने प्रेजेंटेशन के माध्यम से चंद्रयान 1, 2 और 3 अभियानों की अभूतपूर्व उपलब्धियों और चुनौतियों को साझा किया। साथ ही उन्होंने भविष्य की महत्वाकांक्षी अभियानों- चंद्रयान 4 एवं 5 की झलक दिखाते हुए बताया कि भारत अंतरिक्ष अनुसंधान की नई सीमाओं को छूने की ओर अग्रसर है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आदित्य एल-1 मिशन की भी विस्तार से जानकारी दी। श्री वरुण शील ने छात्राओं से आह्वान किया कि वह अंतरिक्ष विज्ञान की चुनौतियों को अवसर मानकर भविष्य की नई खोजों में भारत की अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करें।
इसका आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग ने किया। इस अवसर पर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डा. सुधीर जोशी के साथ डा. विजय कुमार पाटीदार, डा. चंद्र किशोर, डा. आलोक कुमार, डा. कुमार गौरव, अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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