कांठ बंगला बस्ती में विस्थापन के खिलाफ प्रदर्शन

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विस्थापन की कार्रवाई का विरोध, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

पुनर्वास प्रक्रिया पर रोक की मांग

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। कांठ बंगला बस्ती में जारी विस्थापन की कार्रवाई के विरोध में सैकड़ों मज़दूर बस्ती निवासी, विपक्षी दलों के प्रतिनिधि और विभिन्न जन संगठनों के सदस्य मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि MDDA द्वारा किया जा रहा यह कदम राज्य सरकार के वादों और विधान सभा द्वारा पारित विशेष अधिनियम—“उत्तराखंड नगर निकायों और प्राधिकरणों हेतु विशेष प्रावधान अधिनियम, 2018”—के सीधे विपरीत है।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि 2018 के अधिनियम की धारा 4 के अनुसार 11 मार्च 2016 से पहले रह रहे निवासियों को हटाया नहीं जा सकता, जबकि MDDA द्वारा दिए गए नोटिस में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि प्रभावित निवासी 11 मार्च 2016 से पूर्व से रह रहे हैं। बावजूद इसके, बस्ती को 15 दिन में खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

नोटिस में नगर निगम के फ्लैटों में पुनर्वास की बात कही गई है, पर बस्तीवासियों ने कहा कि ये फ्लैट न केवल पुराने हैं, बल्कि नदी के बीचवर्ती क्षेत्र में होने के कारण भविष्य में खतरा पैदा कर सकते हैं। कई ऐसे परिवारों को भी नोटिस भेजा गया है जो नदी से पर्याप्त दूरी पर रहते हैं।

बस्तीवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “देहरादून की किसी भी मलिन बस्ती को नहीं उजाड़ा जाएगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी स्वयं मुख्यमंत्री के वादों और विधान सभा द्वारा पारित कानूनों के विरुद्ध कार्यवाही कर रहे हैं। सभी संगठनों ने इस ग़ैर-कानूनी और एकतरफा कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने तथा पुनर्वास की प्रक्रिया बातचीत और सहमति के आधार पर संचालित करने की मांग उठाई।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे सैकड़ों लोगों को पुलिस ने कालिदास रोड पर रोक लिया। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास में बुलाया गया जहाँ मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी हरीश कोठारी ने उनसे विस्तार से वार्ता की। उन्होंने आश्वस्त किया कि कानूनी और जनपक्षीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कार्यवाही की जाएगी।

सभा के दौरान बस्तीवासियों व जनप्रतिनिधियों ने निर्णय लिया कि इस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, मुख्य सचिव कार्यालय और अन्य संबंधित विभागों में भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

कार्यक्रम में सैकड़ों बस्ती निवासियों के साथ–
सर्वोदय मंडल उत्तराखंड के हरबीर सिंह कुशवाहा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रवीण त्यागी, संजय शर्मा, देवेंद्र सिंह, नेमचंद सूर्यवंशी, सुनीता प्रकाश, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. एस.एन. सचान, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, राजेंद्र शाह, रमन, सुनीता, राजेश्वरी, दिलबहार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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