उत्तराखण्ड के कर्ज का आंकड़ा 94 हजार करोड़ के पार

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दो दशक में दस गुना बढ़ा उत्तराखंड का कर्ज

मार्च 2027 तक एक लाख करोड़ पार होने का अनुमान

अविकल उत्तराखण्ड

भराड़ीसैंण। बेशक, हालिया आंकड़े प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में इजाफे के संकेत दे रहे है। वहीं बढ़ते कर्ज का ग्राफ भी कई सवाल खड़े कर रहा है।

उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में ₹2,73,921 हो गई है। लेकिन राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा 94 हजार करोड़ रुपये पार कर चुका है।

ताजा बजट अनुमानों के अनुसार मार्च 2027 तक राज्य का कुल कर्जा एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है। राज्य गठन के समय से ही हर साल इस कर्जे की लंबाई बढ़ती जा रही है।
यह भी गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक कर्जे की रफ्तार में ब्रेक लगता भी नजर नहीं आ रहा है।

राज्य गठन के समय उत्तराखंड पर करीब 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। बीते दो दशकों में यह तेजी से बढ़कर कई गुना हो गया है। खासकर वर्ष 2010-11 से 2019-20 के बीच कर्ज के ग्राफ में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली।

हालांकि, वर्ष 2020-21 के बाद कर्ज की वृद्धि दर में कुछ कमी आई है, लेकिन कुल कर्ज का ग्राफ लगातार ऊपर ही जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य पर करीब 83 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर लगभग 94 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी सिर्फ एक साल में ही करीब 11 हजार करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार वर्ष 2020-21 के बाद कर्ज की वृद्धि दर में लगातार कमी आ रही है। राज्य का कुल कर्ज अभी जीएसडीपी के लगभग 25 प्रतिशत के आसपास है, जो एफआरबीएम एक्ट की निर्धारित सीमा 30 प्रतिशत से कम है।

इसके बावजूद वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य के राजस्व स्रोतों में तेजी से वृद्धि नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में कर्ज की अदायगी का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को राजस्व बढ़ाने और कर्ज प्रबंधन की रणनीति को और मजबूत करना होगा।

राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल कर्ज की स्थिति नियंत्रित है और इसे वित्तीय अनुशासन के दायरे में रखते हुए विकास कार्यों को भी जारी रखा जाएगा।

क्यों बढ़ रहा है उत्तराखंड पर कर्ज

  • राज्य में सीमित औद्योगिक आधार और संसाधन
  • विकास परियोजनाओं के लिए लगातार निवेश की जरूरत
  • वेतन, पेंशन और सामाजिक योजनाओं पर बढ़ता खर्च
  • आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर अधिक व्यय
  • केंद्र पर वित्तीय निर्भरता

राज्य गठन से अब तक कर्ज का सफर

  • 2000 में राज्य गठन के समय कर्ज – लगभग 9 हजार करोड़
  • 2010 के बाद कर्ज में तेजी से बढ़ोतरी
  • 2024-25 में कर्ज – लगभग 94 हजार करोड़
  • 2026-27 तक अनुमान – 1.04 लाख करोड़

कर्ज पर सरकार का पक्ष

  • कर्ज अभी एफआरबीएम एक्ट की सीमा के भीतर
  • जीएसडीपी के करीब 25 प्रतिशत पर कर्ज
  • विकास कार्यों के लिए लिया जा रहा ऋण
  • राजस्व बढ़ाने के प्रयास जारी

वर्षवार उत्तराखंड का कुल कर्ज (₹ करोड़ में)

  • 2012-13 — 25,540
  • 2013-14 — 28,767
  • 2014-15 — 33,480
  • 2015-16 — 39,069
  • 2016-17 — 44,583
  • 2017-18 — 51,831
  • 2018-19 — 58,039
  • 2019-20 — 65,982
  • 2020-21 — 73,751
  • 2021-22 — 77,023
  • 2022-23 — 78,509
  • 2023-24 — 85,914
  • 2024-25 (संशोधित अनुमान) — 94,666
  • 2025-26 (बजट अनुमान) — 99,632
  • 2026-27 (बजट अनुमान) — 1,04,245

एक नजर में

  • वर्तमान कुल कर्ज – करीब 94 हजार करोड़
  • एक साल में बढ़ोतरी – लगभग 11 हजार करोड़
  • जीएसडीपी के मुकाबले कर्ज – लगभग 25 प्रतिशत
  • मार्च 2027 तक अनुमान – एक लाख करोड़ से अधिक

प्रति व्यक्ति आय ₹2,73,921

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में ₹2,73,921 हो गई है। पिछले चार वर्षों में इसमें तेज़ उछाल आया है, जो 2021-22 में ₹1,94,670 थी। यह राज्य के गठन के समय की तुलना में कई गुना अधिक है।

मुख्य बिंदु (2024-25 सर्वेक्षण)

वर्तमान प्रति व्यक्ति आय: ₹2,73,921 (वर्ष 2024-25 के अनुसार)

विकास दर: पिछले 4 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में लगभग ₹80,000 से अधिक की वृद्धि

राष्ट्रीय औसत से तुलना: उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत (लगभग ₹2,19,575) से काफी अधिक है
वृद्धि के कारण: पर्यटन, सेवा क्षेत्र, ढांचागत विकास और होम स्टे में बढ़ोतरी

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