कांठ बांग्ला बस्ती के विस्थापन पर उठे सवाल

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बस्तीवासियों ने नगर निगम पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

आरटीआई से मांगी जानकारी

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। कांठ बांग्ला बस्ती के प्रस्तावित विस्थापन को लेकर बस्तीवासियों, जन संगठनों और विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने नगर निगम पहुंचकर प्रशासन से जवाब मांगा। उनका आरोप है कि पिछले छह महीनों से जनता द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर प्रशासन चुप है और लोगों को कानून के विपरीत तरीके से धमकाया जा रहा है।

बस्ती के करीब 30 प्रतिनिधियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी भी मांगी है। उनका कहना है कि विस्थापन की प्रक्रिया 2016 और 2018 के बस्ती संबंधी अधिनियमों के विपरीत चलाई जा रही है। बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए पुनर्वास के नाम पर लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जिन फ्लैटों में उन्हें बसाने की बात कही जा रही है, वह कॉम्प्लेक्स नदी के बीच बना हुआ है और करीब 15 वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिससे उसकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बस्तीवासियों का कहना है कि विस्थापन के बाद फ्लैटों का आवंटन किन शर्तों पर होगा, इसके लिए कितना शुल्क लिया जाएगा और किन परिवारों को चुना गया है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि कई लोगों से बिना जानकारी दिए कागजों और आवेदनों पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं।

कानून के उल्लंघन का आरोप, कार्रवाई रोकने की मांग
नगर आयुक्त नमामि बंसल को दिए गए ज्ञापन में कांग्रेस नेता संजय शर्मा ने कहा कि बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस चिपकाकर और बार-बार हटाने की धमकी देकर बस्ती में भय का माहौल बनाया जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरबीर सिंह कुशवाहा ने कहा कि यदि प्रशासन 2016 के बस्ती अधिनियम के तहत कार्रवाई करता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल ने आरोप लगाया कि लोगों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और संबंधित अधिनियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस दौरान पंडितवाड़ी के पार्षद अभिषेक तिवाड़ी, राजेंद्र शाह, सुनीता देवी सहित कई बस्तीवासी मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस कार्रवाई को तत्काल रोकने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।

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