सरकारी जमीनों के मुद्दे पर राज्यपाल हस्तक्षेप करें-कांग्रेस

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सरकारी जमीनों के मुद्दे पर कांग्रेस का अल्टीमेटम

दस दिन में फैसले वापस लेने की मांग

एक लाख करोड़ की सरकारी संपत्ति मुद्दे पर कांग्रेस का हमला

जॉर्ज एवरेस्ट से आईडीपीएल तक हस्तांतरण पर उठाए सवाल

10 दिन बाद हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड में जमीनों और सरकारी संपत्तियों का मुद्दा राजनीतिक टकराव का बड़ा आधार बनता जा रहा है। कांग्रेस ने धामी सरकार पर प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनें निजी हाथों में सौंपने और संपत्तियों के मुद्रीकरण के नाम पर कथित तौर पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर करीब एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही 40 सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त करने, यूआईआईडीबी और सिडकुल को हस्तांतरित जमीनें मूल विभागों को लौटाने तथा संबंधित शासनादेश निरस्त करने की मांग की। साथ ही सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर पार्टी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के जरिए विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। पार्टी के अनुसार यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 164(2) में निहित सामूहिक उत्तरदायित्व और राज्य सरकार की कार्य नियमावली के प्रावधानों के विपरीत है।

कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ भूमि को 15 वर्ष के लिए करीब एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को देने पर गंभीर सवाल उठाए। ज्ञापन में कहा गया कि इस संपत्ति का बाजार मूल्य हजारों करोड़ रुपये है। कांग्रेस का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल तीनों कंपनियां एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। पार्टी ने इसे प्रतिस्पर्धा के नाम पर सरकारी संपत्ति निजी हाथों में सौंपने का मामला बताते हुए लीज निरस्त करने और उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने यूआईआईडीबी अधिनियम-2023 का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी जमीनों और संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए सरकार तथा संबंधित विभाग की मंजूरी जरूरी है। इसके बावजूद मूल विभागों की सहमति के बिना संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनाई गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पटवाडांगर, नगऊ, धनौल्टी, मगरा, आईडीपीएल ऋषिकेश, डाकपत्थर, रामगढ़, एचएमटी रानीबाग, पाटकोट-मरचूला, सलेमपुर महमूद और माजरी ग्रांट की जमीनों के संबंध में निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से अकेले लिए गए।

पटवाडांगर की भूमि के हस्तांतरण को लेकर कांग्रेस ने राजस्व अभिलेखों और मालिकाना हक का मुद्दा उठाया। ज्ञापन के अनुसार, 15 जनवरी 2025 के शासनादेश में भूमि को कृषि विभाग की बताया गया, जबकि बाद में राजस्व विभाग ने संबंधित गांव का सर्वेक्षण शुरू किया। राजस्व परिषद के 9 सितंबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने दावा किया कि 108 एकड़ भूमि वन एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं थी। डाकपत्थर की जमीन को भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और खसरा संख्या निर्धारित किए बगैर हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया।

कांग्रेस ने धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की संपत्तियों को हस्तांतरित नहीं करने संबंधी शासनादेशों की शर्तों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया। इसमें हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल, ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवनों और रामगढ़ के राजकीय उद्यान की भूमि का उल्लेख किया गया। पार्टी का आरोप है कि रामगढ़ उद्यान की करीब चार हेक्टेयर घनी वन भूमि का गैर-वन उपयोग वन संरक्षण कानून के प्रावधानों के विपरीत है।

ज्ञापन में दावा किया गया कि प्रदेश के 13 में से 12 जिलों में स्थित करीब 40 सरकारी संपत्तियों का बाजार मूल्य कम से कम एक लाख करोड़ रुपये है। पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि को 90 वर्ष की लीज पर देने के लिए 37.80 करोड़ रुपये का रिजर्व प्राइस तय किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने पटवाडांगर, अलकनंदा होटल हरिद्वार और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित तीनों टेंडर तत्काल निरस्त करने की मांग की।

गणेश जोशी, धन सिंह रावत और एमबीबीएस दाखिलों का मामला भी उठाया

राज्यपाल के समक्ष कांग्रेस ने सरकारी जमीनों के अलावा तीन अन्य महत्वपूर्ण मामलों में भी हस्तक्षेप की मांग की। इनमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला प्रमुख रहा। कांग्रेस ने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद मुकदमा दर्ज करने के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति नहीं दी गई है। पार्टी ने तत्काल वैधानिक अनुमति देकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।

सहकारिता विभाग में कोरोना काल के दौरान हुई भर्तियों को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के कार्यकाल में राज्य से बाहर प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर नियुक्तियां की गईं। इन भर्तियों में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरियां दिए जाने के आरोपों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई।

इसके अलावा एमबीबीएस की सीटों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले किए जाने के मामले को उठाते हुए कांग्रेस ने समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने कहा कि इन मामलों में कार्रवाई में देरी से सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से सभी मामलों में हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का आग्रह किया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ज्ञापन सौंपे जाने के 10 दिनों के भीतर सरकारी जमीनों के हस्तांतरण संबंधी निर्णय निरस्त कर संपत्तियां मूल विभागों को लौटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी उच्च न्यायालय की शरण लेगी।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट और फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह और राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली शामिल रहे।

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