एआई को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा -बिरला

एआई को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा -बिरला
Share This News:

The post एआई को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा -बिरला appeared first on Avikal Uttarakhand.

एआई तकनीक दैनिक जीवन में ला रही बदलाव-धामी

हरिद्वार में “फेथ एंड फ्यूचर : इंटेग्रटिंग एआई विद स्पिरिचुअलिटी” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को विश्व तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है एआई : लोकसभा अध्यक्ष

प्रौद्योगिकी का सच्चा उद्देश्य मानव जीवन को समृद्ध और उन्नत बनाना है : लोकसभा अध्यक्ष

अविकल उत्तराखंड

हरिद्वार : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सदैव मानवता की सेवा करनी चाहिए और इसे मनुष्य पर नियंत्रण का साधन नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाना आवश्यक है, तभी यह समाज के लिए कल्याणकारी शक्ति बन सकता है। बिरला ने यह उद्गार हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में “फेथ एंड फ्यूचर : इंटेग्रटिंग एआई विद स्पिरिचुअलिटी” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। यह सम्मेलन फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट (अमेरिका) के सहयोग से आयोजित किया गया है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को समृद्ध और उन्नत करना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं। उन्होंने कहा कि यद्यपि एआई अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है, किन्तु इसमें नवाचारपूर्ण समाधानों के बीज भी निहित हैं। भारत की नैतिकता और सत्य की मूलभूत शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को विश्व स्तर पर साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई भारत की प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई जैसी शक्तिशाली तकनीक को विवेक और धैर्य के साथ संतुलित किया जाना चाहिए ताकि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों के आधार पर ही एआई और आध्यात्मिकता का संगम सही दिशा में आगे बढ़ेगा और एक न्यायसंगत एवं समानतामूलक भविष्य की नींव रखेगा। बिरला ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और लोककल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

भारत के प्राचीन आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है) और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी हों) का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि एआई का विकास समावेशी और समानतामूलक होना चाहिए, ताकि इसके लाभ सम्पूर्ण मानवता तक पहुँच सकें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच सार्थक वैश्विक संवाद की शुरुआत करेगा और मानवता को अधिक करुणामय एवं नैतिक भविष्य की ओर अग्रसर करेगा।

इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

एआई तकनीक दैनिक जीवन में ला रही बदलाव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और डॉ. चिन्मय पंड्या को सम्मेलन के आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक आज हमारे दैनिक जीवन, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा और कृषि सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही है। यदि इसका सही दिशा में उपयोग हो तो यह समाज और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र के आस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आयोग के एशिया क्षेत्र के कमिश्नर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। वहीं स्विट्ज़रलैंड की इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन के सेक्रेटरी जनरल मार्टिन चुंगोंग ने वीडियो संदेश के माध्यम से एआई की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर भारत सरकार के एआई मिशन के सीईओ डॉ. अभिषेक सिंह, स्टुअर्ट रसेल, जान टैलिन, डॉ. सचिन चतुर्वेदी सहित अनेक विशेषज्ञों ने विचार रखे। कार्यक्रम में विधायक मदन कौशिक, पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, राज्यमंत्री डॉ. जयपाल सिंह चौहान, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, छात्र-छात्राएँ व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

The post एआई को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा -बिरला appeared first on Avikal Uttarakhand.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *