देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर नवीन शिलापट का लोकार्पण

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परिवर्तन और संस्कार का केंद्र है शांतिकुंज- त्रिवेन्द्र

अविकल उत्तराखंड

हरिद्वार। हरिद्वार स्थित शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित नवीन शिलापट का आज आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद, हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, शांतिकुंज के मार्गदर्शक चिन्मय पंड्या, शेफाली पंड्या के करकमलों द्वारा लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि शांतिकुंज केवल आध्यात्मिक केन्द्र नहीं, बल्कि युग परिवर्तन, समाज निर्माण और मानवीय मूल्यों के संवर्धन का वैश्विक केंद्र है। उन्होंने कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं में संस्कार, सेवा और सामाजिक दायित्व की भावना विकसित होती है, जो उत्तराखंड ही नहीं, पूरे राष्ट्र की शक्ति है।

रावत ने कहा कि यह शिलापट देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उद्देश्य और दर्शन का जीवंत प्रतीक है।
रावत ने इस द्वार को वसुधैव कुटुम्बकम् — विश्व एक परिवार है, की भावना का साकार रूप बताया और कहा कि यह द्वार संस्कार, सेवा और सकारात्मक परिवर्तन की ओर एक नई यात्रा का प्रतीक बनेगा।

सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शांतिकुंज परिवार द्वारा समाज, संस्कार और सेवा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में शिक्षा केवल कक्षाओं में नहीं, बल्कि व्यवहार और जीवन मूल्यों में दी जाती है यही इसकी विशेष पहचान है।

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