पद्म भूषण डॉ जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का आरोप

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हेस्को संस्थान पर लगे आरोप,जांच की मांग

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक मामले में चर्चा में आए पद्म भूषण व पद्म श्री सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का नाम अब आरक्षित वन भूमि से जुड़े एक विवाद में सामने आया है।

देहरादून वन प्रभाग को भेजी गई शिकायत में उनके संस्थान HESCO पर अवैध निर्माण और सड़क निर्माण के आरोप लगाए गए हैं।

दस जनवरी को भेजी गई
शिकायत के अनुसार, आशारोड़ी रेंज के आर्किडिया बीट क्षेत्र में स्थित आरक्षित वन भूमि के भीतर वर्षों से निर्माण गतिविधियां संचालित की गईं। इसके समर्थन में ISRO-BHUVAN और Google Earth के 2011, 2013, 2024 और 2025 के उपग्रह चित्र संलग्न किए गए हैं।

शिकायतकर्ता संदीप चमोली का कहना है कि ये गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के विपरीत हैं। अधिवक्ता ने वन विभाग से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. अनिल जोशी देश के चर्चित पर्यावरणविदों में शामिल हैं और उनके कार्यों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। ऐसे में लगाए गए आरोपों को लेकर वन विभाग की जांच और निष्कर्ष पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

इस मुद्दे पर पदम् भूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी का लिखित वक्तव्य मिलने पर।प्रकाशित किया जाएगा।
गौरतलब है कि 9/10 जनवरी को डॉ जोशी ने अंकिता भंडारी मामले की जांच के बाबत दून में एक नई प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अचानक उठे डॉ जोशी के इस कदम से आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया।
पूर्व सीएम हरीश रावत समेत कई जनसंगठनों ने डॉ जोशी के ‘ढाल’ बनने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

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