चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव: 50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, बीकेटीसी अध्यक्ष बोले- सुगम और सुरक्षित दर्शन हमारी प्राथमिकता !

चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव: 50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, बीकेटीसी अध्यक्ष बोले- सुगम और सुरक्षित दर्शन हमारी प्राथमिकता !
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चारधाम यात्रा के दूसरे चरण की यात्रा के लिए धामों की व्यवस्थाओं को लेकर बदरी केदार मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अमर उजाला से बातचीत के प्रमुख अंश।

चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव पूरा होने जा रहा है। 15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होगा। पहले चरण में दर्शन करने वाले श्रद्वालुओं का आंकड़ा 50 लाख के करीब पहुंच गया है। यात्रा इस बार भी नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ आगे बढ़ रही है।

सवाल : दूसरे चरण की यात्रा के लिए बीकेटीसी की क्या तैयारियां हैं?
जवाब : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा बेहतर ढंग से संचालित हो रही है। इसका प्रमाण धामों में बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या है। मानसून सीजन में यात्रा निर्बाध रूप से चली, अब फिर से इसमें तेजी आएगी। श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन करना सरकार व मंदिर समिति की पहली प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री के साथ यात्रा व्यवस्थाओं पर चर्चा हो चुकी है।

सवाल : घंटों लाइनों में न लगना पड़े, इसके लिए क्या व्यवस्था होगी?
जवाब : केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में हर साल श्रद्धालुओं की संख्या नया रिकॉर्ड बना रही है। श्रद्धालुओं को दर्शन करने में किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए बीकेटीसी ने वीआईपी संस्कृति को खत्म किया। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ने स्वयं की। 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर मुख्यमंत्री ने आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन किए और एक मिनट में मंदिर से बाहर आ गए। भीड़ को देखते हुए मंदिरों में सुबह व शाम होने वाली पूजा का समय कम किया गया।

सवाल : मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए?
जवाब : बीकेटीसी के अधीन बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित 45 अधीनस्थ मंदिर आते हैं। धामों में संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था व निगरानी के लिए रोडमैप तैयार किया है। एआई आधारित आधुनिक प्रणाली को अपनाया जा रहा है। यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधाएं देने पर बीकेटीसी काम रही है।

सवाल : तीर्थपुरोहित व हकहकूकधारियों के हित में क्या निर्णय लेने जा रहे हैं?
जवाब : पहली बार तीर्थपुरोहितों व हकहकूकधारियों के लिए कल्याण कोष बनाया गया। इस कोष से आपात स्थिति में तीर्थपुरोहितों को आर्थिक मदद दी जाएगी। कर्मचारियों के लिए एक अलग से कोष बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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