…तो होटलों में मंथन से निकलेगा पहाड़ के विकास का रास्ता !

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अधिकारियों के रात्रि प्रवास का इंतजार कर रहे ग्रामीण !

दून में ‘विकसित उत्तराखण्ड 2047′  पर मंथन से निकलेगा विकास का अमृत !

विकास की दीर्घकालिक रणनीति,
कनेक्टिविटी से स्टार्टअप तक, विकसित उत्तराखण्ड@2047 के रोडमैप पर जुटेंगे विशेषज्ञ

अविकल थपलियाल

देहरादून। अस्थायी राजधानी के एक होटल में एक बार फिर उत्तराखण्ड के समग्र विकास को लेकर चिंता व्यक्त की जाएगी। कई अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर अपनी अपनी बात रखेंगे। प्रदेश के गांवों और कस्बों को सरसब्ज बनाने की कार्ययोजना पर एक बार फिर आलाधिकारी देहरादून में सिर जोड़कर बैठेंगे।
उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य के रूप में तैयार करने की दिशा में मंगलवार को देहरादून में एक दिवसीय ‘उत्तराखण्ड डेवलपमेंट कॉन्क्लेव-संकल्प विकसित उत्तराखण्ड@2047’ का आयोजन किया जाएगा।

नियोजन विभाग की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव में राज्य के दीर्घकालिक विकास, आर्थिक वृद्धि, पर्यावरणीय चुनौतियों और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को लेकर विशेषज्ञों के साथ मंथन होगा।
चकराता रोड स्थित होटल में सुबह 9:30 बजे से शुरू होने वाले कॉन्क्लेव में तीन प्रमुख सत्र रखे गए हैं।
पहले सत्र का विषय ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर विकसित उत्तराखण्ड@2047- कनेक्टिविटी, रेजिलिएंस एंड इकोनॉमिक ग्रोथ’ है।

इसमें राज्य की कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आपदाओं के प्रति लचीलापन बढ़ाने और आर्थिक विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

दूसरे सत्र में ‘क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एलाइड सेक्टर्स फॉर हाई-वैल्यू, मार्केट-लेड ग्रोथ’ विषय पर मंथन होगा। इसमें जलवायु अनुकूल कृषि, संबद्ध क्षेत्रों, उच्च मूल्य वाली गतिविधियों और बाजार आधारित विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

तीसरा सत्र ‘फ्यूचर-रेडी उत्तराखण्ड: स्टार्टअप्स, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एंड स्किल्स’ पर केंद्रित रहेगा।
इसमें स्टार्टअप, नवाचार, तकनीक और कौशल विकास के जरिए युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप राज्य की अर्थव्यवस्था तैयार करने पर चर्चा होगी।

कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग, पूर्व मुख्य सचिव, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी तथा शोध एवं शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के भाग लेने का प्रस्ताव है। संबंधित विषयों के विशेषज्ञ पैनल चर्चा और परिचर्चा के माध्यम से अपने विचार रखेंगे।
नियोजन विभाग की ओर से सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों और निदेशकों को कॉन्क्लेव में प्रतिभाग करने का अनुरोध किया गया है।
‘संकल्प विकसित उत्तराखण्ड@2047’ के तहत आयोजित यह कॉन्क्लेव राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए प्राथमिकताओं और संभावित रणनीतियों पर विमर्श का मंच बनेगा।
प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम की ओर से विभागों को इस आशय का पत्र भी भेजा गया है।
इस मंथन में पूर्व रक्षा सचिव योगेंद्र नारायण ऑनलाइन जुड़ेंगे। इसके अलावा मुख्य सचिव आंनद बर्धन व शासन से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखेंगे।

पहाड़ी क्षेत्रों में कब जुटेंगे योजनाकार  ?

गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद पर्वतीय राज्य के गांवों का विकास मुख्य मुद्दा रहा है। राज्य के स्कूलों, अस्पताल  समेत अन्य समस्याओं पर आज भी सवालिया निशान खड़े हैं। कमोबेश हर सीएम ने अपने एजेंडे में गांवों के विकास को प्राथमिकता दी है। यही नहीं, अधिकारियों के गांवों में रात्रि विश्राम का कैलेंडर भी जारी किया गया था। 

सीएम धामी समेत कुछ अधिकारियों ने रात्रि प्रवास को अमलीजामा भी पहनाया। लेकिन लम्बे समय से किसी अधिकारी के रात्रि प्रवास के दौरान ग्रामीणों के दुख दर्द जानने की कोई विशेष खबर सामने नहीं आयी।

पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी ने फिजूलखर्ची रोकने के लिए बड़े होटलों में सरकारी समारोह व आयोजनों में ब्रेक लगाया था। लेकिन यह संकल्प भी उनके समय पर ही टूट गया था। और आज सरकारी आयोजन बड़े बड़े होटलों में ही किये जा रहे है।

ऐसे कई शासकीय मंथन पूर्व में भी होते रहे हैं। उन हाई प्रोफाइल कार्यक्रमों की संस्तुतियों व रिपोर्ट्स पर कितना अमल हो पाया। यह भी कोई नहीं जान पाया।
देहरादून के बजाय यही कॉन्क्लेव पंतनगर विवि, भरसार विवि, रानीचौरी विवि, कुमाऊं व गढ़वाल विवि के परिसर में चरणबद्ध व क्रमबद्ध तरीके से आयोजित किये जाने चाहिए।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुभवों को कॉन्क्लेव का हिस्सा बनाने पर  विकसित होने वाले उत्तराखण्ड की जमीनी सच्चाई भी सामने आएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था व गांवों में अपनी मेहनत से सक्सेस स्टोरी लिखने वाले गुमनाम लोगों को चिन्हित कर उनकी कार्ययोजना को अगर सिस्टम अपना ले तो उत्तराखंड 2047 से दस साल पहले 2037 में ही विकसित राज्य का दर्जा हासिल कर लेगा।

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