टोपी पहनाने की सोच अब नहीं चलेगी सीमांत में

टोपी पहनाने की सोच अब नहीं चलेगी सीमांत में
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प्राथमिक के सहायक अध्यापक को किया जीआईसी अटैच

मांगा कुछ ओर मिला कुछ

समिति ने अस्थाई व्यवस्था का किया खुला विरोध

अविकल उत्तराखंड

मुनस्यारी। हिमालय बचाओ संघर्ष समिति ने बिना प्रतिस्थानी के किसी भी शिक्षक को मुनस्यारी तथा धारचूला विकास खंडों से कार्यमुक्त नहीं करने तथा खाली पदो पर विकास खंड स्तर पर स्पेशल विज्ञप्ति निकाल कर भरने की मांग की। शिक्षा विभाग ने इन मांगो पर तो कुछ नहीं किया, लेकिन 30 किमी दूर के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को राइका बांसबगड भेजकर नया विवाद खड़ा कर दिया।
सोमवार को दो मांगो को लेकर समिति ने जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई को ईमेल से पत्र भेजकर सीमांत की शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को दुरुस्त करने की मांग की।

मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी को राइका बांसबगड शिक्षण में शैक्षिक कार्य हेतु अटैच कर दिया है।

प्राथमिक का शिक्षक इंटर कालेज में अटैच करने के उद्देश्य पर भी सवाल उठने लगे है।
शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों को संवर्ग के मुताबिक अध्यापन का कार्य दिया जाता है। इस आदेश ने इस पुरातन सरकारी नियमों की भी धज्जियाँ उडा दी है।

समिति के प्रदेश अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने कहा कि हमारे पत्र का अध्ययन किए बगैर इस तरह का आदेश निकालना ठीक नहीं है। सीमांत के विद्यालयों से एक शिक्षक को दूसरे विद्यालय में भेजना समस्या का समाधान नहीं है। मर्तोलिया ने कहा कि विकास खंड पिथौरागढ, मूनाकोट तथा कनालीछीना में छात्र संख्या कम होने के बाद भी तैनात शिक्षकों को सीमांत में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुगम व दुर्गम के आधार पर होने वाले स्थानांतरण पर रोक लगा दी है।

उन्होंने कहा कि सीमांत में एक विद्यालय की टोपी दूसरे विद्यालय के सिर में डालने की प्रथा का पुरजोर विरोध होगा।

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