संस्कृत को जनभाषा बनाने के लिए राज्यों में समन्वय पर जोर

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अविकल उत्तराखंड

देहरादून। गुजरात संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हिमांजल पालीवाल और प्रशासनिक अधिकारी निकुंज पटेल ने उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा विभाग की गतिविधियों के अनुश्रवण के लिए चल रहे चार दिवसीय राज्य भ्रमण के तीसरे दिन संस्कृत शिक्षा निदेशालय एवं उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद का भ्रमण किया।

इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, निदेशक मंजू भारती और उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य ने गुजरात से आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। पालीवाल ने उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा विभाग की गतिविधियों की सराहना करते हुए संस्कृत भाषा की व्यापक संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए गुजरात और उत्तराखंड के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता बताई। संस्कृत को जनभाषा बनाने के लिए संचालित संस्कृत संभाषण कार्यक्रमों और संस्कृत ग्रामों के प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।

बैठक में निदेशालय एवं परिषद की कार्यप्रणाली, शासनादेशों, अवस्थापना, पद संरचना और अन्य प्रासंगिक विषयों पर चर्चा हुई। निदेशक मंजू भारती ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तराखंड में संचालित संस्कृत शिक्षा संबंधी गतिविधियों और विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दी। साथ ही प्रस्तावित योजनाओं का प्रारूप भी प्रस्तुत किया।

डॉ. वाजश्रवा आर्य ने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, भाषा के प्रचार-प्रसार, विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने तथा विभागीय योजनाओं को जनोन्मुखी बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने संस्कृत के संवर्धन के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री और विधायकों के लिए संस्कृत संभाषण कार्यक्रम, राज्यभर में द्विभाषी नाम पट्टिकाएं, प्रवेशिका संस्थाएं, ऑनलाइन संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण तथा सचिवालय भवन में संस्कृत संभाषण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया था। संस्कृत ग्रामों के माध्यम से स्थानीय समुदायों में संस्कृत सीखने और भारत की दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत से जुड़ने के प्रति उत्साह बढ़ा है। बैठक में निदेशालय एवं परिषद के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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