हरिद्वार में 102 मदरसे बंद, उत्तराखंड में कुल आंकड़ा 107 पहुंचा; मान्यता को लेकर सख्ती !

हरिद्वार में 102 मदरसे बंद, उत्तराखंड में कुल आंकड़ा 107 पहुंचा; मान्यता को लेकर सख्ती !
Share This News:

हरिद्वार के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्र प्रकाश रावत ने मंगलवार को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को मदरसों की जो रिपोर्ट भेजी है।

प्रदेश में बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर सरकार की सख्ती के बाद 107 मदरसे बंद हो गए हैं। इसमें सबसे अधिक 102 मदरसे हरिद्वार जिले के हैं। सात सितंबर को अमर उजाला में मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने के बाद हरिद्वार एवं कुछ अन्य जिलों ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट भेजी है।

हरिद्वार के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्र प्रकाश रावत ने मंगलवार को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को मदरसों की जो रिपोर्ट भेजी है। उसमें बताया है कि हरिद्वार जिले में 102 मदरसे बंद हो चुके हैं। 76 मदरसों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है। जो विचाराधीन है। 45 मदरसे शिक्षा विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि 46 मदरसों का अभी निरीक्षण किया जाना है।

राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के मुताबिक हरिद्वार के अलावा ऊधमसिंह नगर में 119 मदरसे हैं। इनमें से अब तक पांच मदरसे बंद हो चुके हैं। जबकि 60 मदरसे ऐसे हैं, जिसने अब तक शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। जबकि नैनीताल जिले में 18 मदरसों में से 12 ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक पिथौरागढ़ जिले में एक और चंपावत जिले में दो मदरसे हैं। प्राधिकरण को दोनों जिलों के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की अभी रिपोर्ट नहीं मिली।

मदरसा बोर्ड से पूर्व में पंजीकृत मदरसे

मदरसा बोर्ड खत्म होने से पहले बोर्ड से देहरादून में 41, नैनीताल में 18, अल्मोड़ा में एक, पिथौरागढ़ में एक, हरिद्वार में 270, ऊधमसिंह नगर में 119 और चंपावत में दो मदरसे तहतानिया, फौकानिया, मुंशी-मौलवी एवं आलिम, अरबी-फारसी की मान्यता लिए थे। इसके अलावा भी राज्य में कई अन्य मदरसे चल रहे थे। मदरसा बोर्ड से बिना पंजीकृत मदरसों की प्राधिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास रिपोर्ट नहीं है।

मुख्यमंत्री धामी के स्पष्ट निर्देशों और सख्त नीतियों के अनुपालन में प्रशासन की ओर से मदरसों की जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान का ही नतीजा है कि बिना मान्यता चल रहे कई मदरसे खुद ही बंद हो चुके हैं। अभियान आगे भी जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *