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बांसुरी स्वराज ने की ठोस पैरवी
लालढांग–चिल्लरखाल रोड बनने की उम्मीद जगी
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सांसद बलूनी ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की थी
अविकल उत्तराखंड
नई दिल्ली। राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग–चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर उच्चतम न्यायालय ने 2023 से लगा स्टे ऑर्डर को हटा दिया है। यह फैसला कोटद्वार एंव आसपास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
कई सालों से यह मोटर मार्ग नहीं बन पा रहा था। क्षेत्र की जनता भी लम्बे समय से सड़कों पर उतरी हुई है। इस बाबत स्थानीय व्यक्ति प्रवीण थापा ने 11 दिन तक पैदल चलकर दिल्ली कूच किया था। और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ध्यान आकृष्ट किया था।
इस मुद्दे पर सांसद अनिल बलूनी ने सुप्रीम कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज स्टे खारिज कर दिया।
सांसद बलूनी ने बताया कि
राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग–चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर आज माननीय उच्चतम न्यायालय ने मेरे इंटरवेंशन एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए 2023 से लगा स्टे ऑर्डर को हटा दिया है। यह फैसला कोटद्वार एंव आसपास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
सांसद बलूनी ने
सभी क्षेत्रीय जनता को बधाई देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय में गढ़वाल की जनता का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नई दिल्ली से सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज , अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव जी और अधिवक्ता वैभव थलेडी ने पुरजोर पैरवी की।
स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी ने भी स्टे हटने पर खुशी जताई।
गौरतलब है कि लालढांग-चिल्लरखाल (कंडी) मोटर मार्ग के डामरीकरण और निर्माण के लिए कोटद्वार क्षेत्र की जनता लंबे समय से मांग कर रही है, जिसके तहत दिल्ली कूच और जन आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है।
इस मार्ग का निर्माण कार्य, जो राजाजी और कॉर्बेट पार्क के बीच से गुजरता है, सख्त वन कानूनों और पारिस्थितिक चिंताओं के कारण रुका हुआ है।

इस सड़क के बनने से कोटद्वार से हरिद्वार/देहरादून की दूरी कम होगी, जिससे उत्तर प्रदेश होकर जाने वाले भारी भरकम टैक्स से मुक्ति मिलेगी।
आंदोलित स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वन अधिनियम के कारण उत्तराखंड का विकास रुक गया है, और वे इस मार्ग को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
पर्यावरण की चिंता
सुप्रीम कोर्ट की एक समिति ने इस मार्ग पर ब्लैक टॉपिंग (डामरीकरण) का विरोध किया है क्योंकि यह बाघ और हाथियों का प्रमुख गलियारा है।
यह मार्ग कोटद्वार और गढ़वाल के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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