स्पर्श हिमालय विवि के ‘हिमफैस्ट 2026’ का भव्य समापन

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अविकल उत्तराखंड

देहरादून। “स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारवान और उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण कर रहा है।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए नैतिक मूल्यों और सुदृढ़ संस्कारों से युक्त शिक्षा अनिवार्य है।” यह उद्गार विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी ने देहरादून स्थित हिमालय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान के स्थापना दिवस समारोह ‘हिमफैस्ट 2026’ के समापन अवसर पर व्यक्त किए।
उन्होंने नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान किए जाने को समयोचित और दूरदर्शी पहल बताया।

समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं छात्र-छात्राओं की सुमधुर सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण परिसर को आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया। इसके पश्चात टैगोर, अशोक, आज़ाद एवं शिवाजी हाउस के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक मार्च-पास्ट ने अनुशासन, उत्साह और समर्पण की अनुपम छटा बिखेरी। समवेत कदमताल और जोशपूर्ण प्रस्तुति ने समारोह में ऊर्जा और उल्लास का संचार किया।

संस्थान की उपाध्यक्ष विदुषी निशंक ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि स्वर्णिम भारत के निर्माण हेतु स्वर्णिम चरित्र का निर्माण अनिवार्य है। उन्होंने गर्वपूर्वक उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। उनके अनुसार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि नवाचार और मूल्यपरक शिक्षा का सशक्त केंद्र है।

विशिष्ट अतिथि डोईवाला विधायक बृज भूषण गैरोला ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने उत्तर भारत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने विद्यार्थियों से चिकित्सा सेवा को व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का श्रेष्ठ माध्यम मानने का आह्वान किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र शिक्षा और स्वास्थ्य चेतना के समन्वय को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक जीवन-दर्शन है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक विज्ञान के साथ संतुलित समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण है, और स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. राकेश सुंदरियाल ने कहा कि अल्पावधि में ही विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। यहाँ शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं बहुआयामी विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें विभिन्न राज्यों की लोक-सांस्कृतिक झलकियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। 11 फरवरी से आयोजित शैक्षणिक, खेल एवं क्विज़ प्रतियोगिताओं का आकर्षक रिकैप वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट एवं निष्ठावान अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा सुरक्षा कर्मियों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

समारोह में राज्य मंत्री सुभाष वर्थवाल, नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी, विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप भारद्वाज, आर्यन देव उनियाल, पूर्व आयुष निदेशक पूजा भारद्वाज, पूर्व प्रति कुलपति डॉ. राजेश नैथानी, संस्थान के सचिव बालकृष्ण चमोली सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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