उत्तराखण्ड ने केंद्र से मांगा 5702.15 करोड़ का आर्थिक पैकेज

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एनडीएमए को सौंपा विस्तृत ज्ञापन, 8 सितम्बर को आएगी केंद्रीय टीम

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। आपदा प्रबंधन विभाग ने इस वर्ष मानसून के दौरान हुई क्षति की प्रतिपूर्ति तथा भविष्य में अवस्थापना संरचनाओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार से 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु तथा सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तथा एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज को ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तथा सचिव मनीष भारद्वाज ने उत्तराखण्ड को हर स्तर पर सहयोग का आश्वासन दिया। राजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ने इस वर्ष मानसून सीजन में धराली, थराली जैसी भयावह आपदाओं का सामना किया है। राज्य को व्यापक क्षति हुई है, इसमें कोई दोराय नहीं। संकट की इस घड़ी में भारत सरकार राज्य के साथ खड़ी है और एनडीएमए के स्तर पर हर संभव आर्थिक सहयोग राज्य को प्रदान किया जाएगा ताकि आपदा प्रभावितों को हर स्तर पर मदद मिल सके, राज्य जल्द सामान्य स्थिति की ओर अग्रसर हो तथा आपदाओं के प्रभावों को कम करने की दिशा में दीर्घकालिक समाधान किए जा सकें।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदा से लोक निर्माण विभाग तथा सार्वजनिक सड़कों को लगभग 1163.84 करोड़, सिंचाई विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास को 4 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 करोड़ तथा अन्य विभागीय परिसम्पत्तियों को 213.46 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। कुल मिलाकर सभी विभागों को लगभग 1944.15 करोड़ की सीधी क्षति हुई है।

इन परिसम्पत्तियों के पुनर्निर्माण तथा पुनर्प्राप्ति में उपरोक्त धनराशि 1944.15 करोड़ के साथ-साथ, क्षतिग्रस्त होने की कगार पर खड़ी परिसम्पत्तियों, मार्गों, आबादी वाले क्षेत्रों तथा अन्य अवस्थापना संरचनाओं को स्थिर करने के लिये 3758.00 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया गया है। इस प्रकार वर्ष 2025 में हुई आपदा से क्षति के लिये उत्तराखण्ड राज्य ने कुल 5702.15 करोड़ रुपये की मांग की है, ताकि आपदा से क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों की मरम्मत, पुनर्प्राप्ति एवं पुनर्निर्माण कराया जा सके और संभावित बड़ी क्षति से बचा जा सके।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से वर्ष 2025 में 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक कुल 79 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, 115 लोग घायल हुए हैं तथा 90 लोग लापता हैं। कुल 3953 छोटे तथा बड़े पशुओं की मृत्यु हुई है। 238 पक्के भवन ध्वस्त हुए हैं, 2 कच्चे भवन ध्वस्त हुए हैं, 2835 पक्के भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा 402 कच्चे भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त बहुत बड़ी संख्या में व्यवसायिक भवन, दुकानें, होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट तथा अन्य संरचनायें क्षतिग्रस्त हुई हैं।


केंद्र से मिल रहा है भरपूर सहयोग: मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार राज्य के साथ खड़े रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब तक हर संभव सहयोग प्रदान किया है, जिसके परिणामस्वरूप राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित गति मिली है। प्रधानमंत्री ने राज्य को आपदाओं से हुई क्षति के संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। प्राप्त निर्देशों के क्रम में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार से विशेष सहयोग का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा से हुई भारी क्षति की भरपाई हेतु राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके, क्षतिग्रस्त अवसंरचना का शीघ्र पुनर्निर्माण हो सके तथा आजीविका के साधनों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि साझा प्रतिबद्धता ही उत्तराखंड को शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटाने और आपदा प्रभावितों के जीवन में स्थिरता लाने में सहायक होगी।


सीएस आनंद बर्द्धन के निर्देशन में तैयार हुआ ज्ञापन

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन में यह ज्ञापन तैयार किया गया। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर एनडीएमए एवं भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क स्थापित करते हुए उत्तराखण्ड में आपदा से हुई क्षति से अवगत कराया। हाल ही में नई दिल्ली में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय तथा गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से भेंट कर विशेष आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि भारत सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में राज्य सरकार ने एक विस्तृत ज्ञापन तैयार कर केंद्र सरकार को सौंप दिया है।


एनडीएमए के साथ वार्ता सकारात्मक: आरके सुधांशु

देहरादून। प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने बताया कि एनडीएमए के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता अत्यंत सार्थक एवं सकारात्मक रही। बैठक में राज्य सरकार द्वारा आपदा से हुई क्षति के संबंध में प्रस्तुत विस्तृत ज्ञापन पर गहन विचार-विमर्श किया गया। ज्ञापन में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, अवसंरचना को हुई क्षति, आपदा राहत एवं पुनर्वास के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग तथा भविष्य की पुनर्निर्माण आवश्यकताओं से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा हुई।

एनडीएमए के अधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लिखित तथ्यों और मांगों को पूर्णतः उचित ठहराते हुए अपनी सहमति प्रदान की है तथा यह आश्वासन दिया है कि राज्य को हर संभव आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराया जाएगा।


8 सितंबर को आएगी केंद्रीय टीम: सुमन

देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 8 सितम्बर 2025 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम उत्तराखण्ड के दौरे पर आ रही है। यह टीम राज्य में वर्ष 2025 के दौरान आई आपदाओं से हुई क्षति का स्थलीय आकलन करेगी।

इस टीम का नेतृत्व आर. प्रसना, संयुक्त सचिव गृह मंत्रालय करेंगे। टीम के साथ अन्य छह सदस्य भी रहेंगे जिनमें उप निदेशक महेश कुमार, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह, निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह तथा आर. कृष्णा कुमारी शामिल हैं।

अंतर-मंत्रालयी टीम आपदा प्रभावित जनपदों का दौरा करेगी और वहां की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करेगी। इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं ताकि टीम को प्रभावित क्षेत्रों की वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा सुचारू रूप से हो सके।

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