‘सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी’

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देश के सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास को वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम- केंद्रीय मंत्री

अविकल उत्तराखंड

नई दिल्ली। हरिद्वार के सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया। उन्होंने सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में विभिन्न राज्यों में निधि आवंटन, व्यय, तथा बुनियादी ढांचे के विकास की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी।

सांसद रावत ने अपने प्रश्न के माध्यम से यह भी जानना चाहा कि क्या सीमावर्ती गांवों में सड़क, स्वास्थ्य एवं संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, तथा क्या इस कार्यक्रम को वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP) के साथ एकीकृत किया गया है।

इस पर गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि बीएडीपी का क्रियान्वयन 16 राज्यों एवं 2 केंद्र शासित प्रदेशों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0-10 किमी के भीतर स्थित गांवों में किया जा रहा है। वर्ष 2004-05 से अब तक 39,248 से अधिक विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनमें सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी एवं अन्य सामाजिक अवसंरचनाएं शामिल हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में ₹168.90 करोड़ की राशि प्रतिबद्ध देयताओं के तहत जारी की गई है तथा वर्तमान में बीएडीपी अपने सनसेट फेज में है। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास हेतु वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP-I एवं VVP-II) को लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत हजारों गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

सांसद रावत ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक सुदृढ़ता, दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं निश्चित रूप से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने में सहायक सिद्ध होंगी।

उन्होंने विशेष रूप से यह भी उल्लेख किया कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के माध्यम से सीमांत गांवों में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार के अवसरों एवं जीवन स्तर में व्यापक सुधार आएगा, जिससे पलायन पर भी रोक लगेगी।

सांसद रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं गृह मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत के सीमा गांव ‘अंतिम नहीं, बल्कि प्रथम गांव’ के रूप में विकसित होंगे।

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