ऋषिकेश: नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान !

ऋषिकेश: नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान !
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परमार्थ निकेतन गंगा तट पर चल रही 34 दिवसीय श्रीराम कथा मंगलवार को 33 वें दिन में प्रवेश कर गई। अधिकमास पूर्ण होने पर आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अब शुभ कार्यों का श्रेष्ठ समय शुरू हुआ है, सभी को समाज और राष्ट्र कल्याण के संकल्प लेने चाहिए। स्वामी ने राजा बाली-अंगद प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि सबसे बड़ी शक्ति प्रभु चरणों में है। उन्होंने जोर दिया कि सनातन संस्कृति बचाने के लिए बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक व नैतिक संस्कार भी देने होंगे। घर ईंट-पत्थर से नहीं, संस्कृति-संस्कारों से बनता है। प्रेम, सम्मान, अनुशासन और प्रभु स्मरण के बिना भवन केवल मकान है, घर नहीं। उन्होंने परिवारों से रोज सामूहिक प्रार्थना और बच्चों को संस्कारी बनाने का आह्वान किया। कथा के दौरान लाखों पौधे लगाने और संरक्षित करने का संकल्प भी लिया गया। स्वामी ने कहा कि वृक्ष जीवन रक्षक हैं, हर व्यक्ति एक पौधा जरूर लगाएं। कथावाचक संत मुरलीधर ने कहा कि कथा से लिए गए संस्कार, संस्कृति रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।

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