डोईवाला विधानसभा सीट सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा-कांग्रेस में टिकट पाने की दौड़ में कई चेहरे शामिल हैं।
भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली डोईवाला विधानसभा में बृजभूषण गैरोला विधायक हैं लेकिन यहां की विरासत संभालने के लिए भाजपा के कई दावेदार मैदान में जोर आजमाइश करने लगे हैं। संगठन अपने वर्तमान विधायक पर ही भरोसा करेगा या किसी नए चेहरे पर दांव खेलेगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन टिकट की दौड़ दिलचस्प होने वाली है।
डोईवाला विधानसभा वैसे तो भाजपा का गढ़ रही है। यहां पांचों विधानसभा चुनावों में भाजपा को ही जीत मिली। केवल 2014 के उपचुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। 2002 में यहां भाजपा के त्रिवेंद्र रावत ने कांग्रेस के विरेंद्र मोहन उनियाल को 1536 मतों के अंतर से हराया था। 2007 के चुनाव में भाजपा के त्रिवेंद्र रावत ने कांग्रेस के विरेंद्र मोहन उनियाल को 14,127 मतों के अंतर से हराया। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट को 1272 मतों से हराया। इसके बाद निशंक के लोकसभा चले जाने से यह सीट खाली हो गई।
डोईवाला विधानसभा सीट पर कांग्रेस में दावेदारों की सक्रियता से सियासी हलचल बढ़ रही है। राज्य गठन के बाद इस सीट का सियासी इतिहास देखा जाए तो कांग्रेस उपचुनाव में ही खाता खोल पाई है। आम चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। डोईवाला विधानसभा हॉट सीट मानी जाती है। भले ही कांग्रेस को आम चुनाव में जीत नहीं मिली हो लेकिन दावेदारों ने टिकट पाने के लिए कसरत शुरू कर दी है।
