नागरिकों की जिंदगी बेहतर बनाने में सहभागी बने अधिवक्ता : जस्टिस सूर्यकांत

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भारत के प्रधान न्यायाधीश ने किया लेखक गांव का भ्रमण

विधि छात्रों से रूबरू हुए जस्टिस सूर्यकांत

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। लेखक गांव में भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे इस स्थान पर आकर अभिभूत हैं। उन्होंने रचनात्मकता को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनने पर जोर दिया। इसी दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों के लॉ स्टूडेंट्स से बात करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने विधि पेशे को लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने में उपयोग किए जाने पर जोर दिया।

लेखक गांव पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस रमेश चंद्र शर्मा का उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत के शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ एवं लेखक गांव की निदेशक डॉ. विदुषी निशंक द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम के पहले चरण में उन्होंने पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियों, विभिन्न विषयों के कुलपतियों एवं शिक्षाविदों से संवाद किया। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि लेखक गांव की स्थापना और इसके पीछे का उद्देश्य अत्यधिक उल्लेखनीय है। इस स्थान पर उन्हें गहरी रचनात्मक अनुभूति का एहसास हुआ। जस्टिस सूर्यकांत ने जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं, भाषा और साहित्य के संरक्षण में अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करना चाहिए। इस मौके पर पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’, पद्मश्री आर.के. जैन, कुलपति प्रोफेसर अनुभा सिंह, कुलपति प्रोफेसर राकेश सुंदरियाल, स्पर्श हिमालय के कुलाधिपति डॉ. प्रदीप भारद्वाज, पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सविता मोहन, एंजेल नैथानी ने जस्टिस सूर्यकांत के साथ संवाद में भाग लिया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में जस्टिस सूर्यकांत ने उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से आए विधि छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि विधि का पेशा धैर्य, समर्पण और सतत परिश्रम की मांग करता है। यह एक ऐसा कार्य क्षेत्र है जहां करियर की शुरुआत की औसत उम्र 35 साल है, लेकिन इस व्यवसाय के माध्यम से आप पूरी जिंदगी लोगों की मदद कर सकते हैं और उन्हें न्याय दिला सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने भावी अधिवक्ताओं से कहा कि वे कभी भी पैसा कमाने को अपनी प्राथमिकता न बनाएं। जब वे न्याय और विधि के पेशे में सफल होंगे तो पैसा स्वयं ही उनके पास आएगा।

इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने छात्र-छात्राओं से उनके भविष्य की योजनाओं, वर्तमान तैयारी और विधि पेशे की चुनौतियों के विषय में विस्तार से बातचीत की। छात्र-छात्राओं ने भी जस्टिस सूर्यकांत के साथ संवाद में अत्यधिक रुचि दिखाते हुए उनसे कई जिज्ञासाएं रखीं और वादा किया कि वे भविष्य में एक अच्छे अधिवक्ता और एक अच्छे न्यायिक अधिकारी बनेंगे।

इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस शर्मा ने लेखक गांव परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने अटल पथ, राष्ट्रीय पार्क और नक्षत्र वाटिका के प्रयासों की सराहना की, साथ ही भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में अधिक समय लेकर यहां के युवाओं से संवाद करेंगे और लेखकों के अनुभवों को भी सुनेंगे।

इस अवसर पर भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि भारत के पहले लेखक गांव में देश के प्रधान न्यायाधीश के आगमन ने युवा लेखकों, रचनाकारों के मन में नए उत्साह का संचार किया है। उन्होंने कहा कि वे लेखक गांव को एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के रचनाधर्मियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे। उन्होंने कहा कि इस समय लेखक गांव के साथ 65 से अधिक देशों के लेखक सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, साथ ही देश के 50 से अधिक पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियां भी लेखक गांव को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।

कार्यक्रम के संवाद सत्र का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, उत्तराखंड के महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर, राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, आर्यन देव उनियाल, डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. पूजा पोखरियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल, डॉ. अरविंद अरोरा, डॉ नीरज श्रीवास्तव, डॉ निशांत राय जैन, डॉ प्रदीप कोठियाल, कृष्ण कुमार कुड़ियाल, अनिल शर्मा आदि सहित प्रमुख लोग उपस्थित हुए।

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