सूचना न भेजने वाले विभागाध्यक्षों पर हीला-हवाली का आरोप

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मुख्य सचिव से सख्त कार्रवाई की मांग

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पाण्डे एवं प्रदेश महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने आज मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन से मुलाकात कर प्रदेश के राज्य कार्मिकों को 10, 16 एवं 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य किए जाने से संबंधित प्रकरण पर शीघ्र कार्यवाही की मांग की।

परिषद के पदाधिकारियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस विषय में विभिन्न विभागाध्यक्षों द्वारा अतिरक्त व्यय के आंकलन से संबंधित सूचना अब तक शासन को नहीं भेजी गई है। परिषद ने ऐसे विभागाध्यक्षों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है तथा मुख्य सचिव से सक्षम स्तर पर विभागीय अधिकारियों की बैठक आहूत किए जाने का अनुरोध किया है।

परिषद के प्रदेश प्रवक्ता आर.पी. जोशी ने बताया कि वित्त अनुभाग-7 के शासनादेश संख्या 1/323347/XXVII(7)25-E-44211/2022 दिनांक 19 अगस्त 2025 के तहत सभी विभागाध्यक्षों को 15 दिन के भीतर अतिरिक्त व्यय का आंकलन कर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। किंतु अब तक केवल 16 विभागों से ही सूचना प्राप्त हुई है, जिसके अभाव में यह प्रकरण शासन स्तर पर लंबित है।

उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी शासन द्वारा 20 जनवरी 2023 एवं 12 मई 2023 को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई थी, परंतु अधिकांश विभागाध्यक्षों ने आज तक कोई सूचना नहीं भेजी। परिषद ने इसे कार्मिक विरोधी मानसिकता बताते हुए कहा कि शासनादेशों की बार-बार अवहेलना करना गंभीर लापरवाही है।

परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पाण्डे ने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि ऐसे विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाए तथा सक्षम स्तर से संबंधित विभागों की बैठक बुलाकर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

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