अंकिता भंडारी मर्डर- सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी

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वीआईपी’ का नाम उजागर कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग

आंदोलनकारियों ने जांच पर उठाए सात बड़े सवाल

मूसलाधार बारिश में भी न्याय की हुंकार

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को देहरादून के सीमा द्वार (आईटीबीपी के निकट) स्थित सीबीआई कार्यालय में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

पुलिस प्रशासन ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद आंदोलनकारी महिलाएं दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंचीं और वहां प्रतीकात्मक रूप से तालाबंदी कर दी।

इस दौरान सीबीआई के अधिकारी बाहर आए, लेकिन वे कार्यालय परिसर के भीतर ही रहे और वहीं से आंदोलनकारियों से वार्ता की। आंदोलनकारियों ने अधिकारियों के समक्ष जांच की वर्तमान स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए और जवाब मांगे। अधिकारियों के उत्तरों से असंतुष्ट आंदोलनकारियों ने मुख्य द्वार पर भी प्रतीकात्मक रूप से ताला जड़ दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा घोषित सीबीआई कार्यालय तालाबंदी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी की गई, जनगीत गाए गए और आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता न्याय यात्रा के दौरान लिया गया संकल्प हर हाल में पूरा किया जाएगा।

आंदोलनकारियों के प्रमुख सवाल

अंकिता भंडारी मामले में कथित ‘वीआईपी’ आखिर कौन है?
दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई?
मुख्यमंत्री के आदेश पर बुलडोजर चलाकर साक्ष्य मिटाने के आरोपों की जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
संभावित साक्ष्य नष्ट करने वालों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई?
छह माह की सीबीआई जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है?
क्या सीबीआई ने उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की है?
अंकिता भंडारी के माता-पिता के बयान अब तक क्यों दर्ज नहीं किए गए?

प्रदर्शन के दौरान “सीबीआई जवाब दो”, “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “वीआईपी को गिरफ्तार करो”, “दुष्यंत गौतम से पूछताछ कब होगी?”, “अजय कुमार से पूछताछ करो” और “साक्ष्य मिटाने वालों को गिरफ्तार करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।
भारी बारिश के बीच भी आंदोलनकारी डटे रहे और वक्ताओं को ध्यानपूर्वक सुना। वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की लड़ाई है।
कार्यक्रम में कमला पंत, सुजाता पॉल, निर्मला बिष्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहित डिमरी, अधिवक्ता अलमास सिद्दीकी, शंकर गोपाल, ललित उत्तराखंडी (उत्तराखंड टाइगर फोर्स), मनीष सुंदरियाल, विनोद कुमार धस्माना (उत्तराखंड समानता पार्टी) सहित अनेक सामाजिक एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। त्रिलोचन भट्ट और सतीश धौलखंडी ने जनगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी मौजूद रहे।

आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना था कि जनता अब सच जानना चाहती है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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