बजट सत्र- देहरादून स्मार्ट सिटी घपले पर कैग का बड़ा खुलासा

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बजट सत्र में पेश कैग रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों का उल्लेख

737 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरा सपना

बिना टेंडर हुए 2.93 करोड़ रुपये के काम

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन के तहत संचालित देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। मंगलवार को गैरसैंण बजट सत्र में कैग की रिपोर्ट पेश की गई।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में बिना टेंडर कार्य कराए जाने, परियोजनाओं में देरी और वित्तीय प्रबंधन में खामियों की बात सामने आई है।

कैग ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच स्मार्ट सिटी के तहत किए गए कार्यों का ऑडिट किया।
रिपोर्ट के अनुसार जून 2023 तक पूर्ण होने वाली कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जिसके कारण परियोजना की अवधि बढ़ाकर वर्ष 2024 तक करनी पड़ी।

देहरादून को वर्ष 2017 में स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए चयनित किया था। इसके लिए कुल 1000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था।

वर्ष 2016 से 2023 के बीच 737 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 634.11 करोड़ रुपये खर्च किए गए। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंपी गई थी। कैग ने कुल 22 परियोजनाओं का ऑडिट किया, जिसमें कई खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 2.93 करोड़ रुपये के कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए कराए गए। इसके अलावा कई परियोजनाओं में तय समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं होने के बावजूद कार्यदायी संस्था से लगभग 19 करोड़ रुपये की वसूली भी नहीं की गई।

स्मार्ट सिटी योजना के तहत देहरादून के तीन सरकारी स्कूलों में 5.91 करोड़ रुपये की लागत से कंप्यूटर लैब, इंटरएक्टिव बोर्ड, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी और बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गईं, लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं किया गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया कि दून कमांड एंड कंट्रोल सेंटर परियोजना के तहत ठोस कूड़ा प्रबंधन की निगरानी के लिए मार्च 2022 में बायोमीट्रिक और सेंसर आधारित प्रणाली विकसित की गई थी, लेकिन फरवरी 2025 तक इसे लागू नहीं किया जा सका।

इससे करीब 4.55 करोड़ रुपये का खर्च निष्फल हो गया।
स्मार्ट अपशिष्ट वाहन योजना के तहत लगभग 90 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए ई-रिक्शा दो वर्षों तक संचालन में नहीं लाए गए। वहीं शहर में मौसम और प्रदूषण की जानकारी के लिए लगाए गए पर्यावरण सेंसरों पर 2.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन उनका भी उपयोग नहीं किया गया। मल्टी यूटिलिटी डक्ट परियोजना पर 3.24 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद उसका भी लाभ नहीं मिल पाया।

कैग रिपोर्ट में परियोजना प्रबंधन सलाहकार को अधूरी परियोजनाओं के बावजूद भुगतान किए जाने का भी उल्लेख है। ‘सिटीज इंवेस्टमेंट टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेनÓ परियोजना में सलाहकार भुगतान में 5.19 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई।
आठ परियोजनाओं में कार्यस्थल समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण 38 महीने तक की देरी हुई। इसके बावजूद अग्रिम भुगतान का समायोजन नहीं किया गया और ठेकेदारों पर 1.41 करोड़ रुपये का दंड भी नहीं लगाया गया। गलत वित्तीय प्रबंधन के कारण सरकार को करीब 6.20 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी उठाना पड़ा।

स्मार्ट पोल परियोजना के तहत शहर में 130 स्मार्ट पोल और 100 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की योजना थी, लेकिन वर्ष 2023 तक केवल 27 स्मार्ट पोल ही लगाए जा सके और करीब 70 किलोमीटर ओएफसी ही बिछाई गई।
इसके अलावा शहर में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई 41.56 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रिक बस परियोजना भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। वर्ष 2020 में 30 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया था, लेकिन अनुमानित 3.93 लाख रुपये प्रतिदिन की आय के मुकाबले केवल 1.29 लाख रुपये प्रतिदिन ही आय हो सकी। मार्च 2023 तक ई-बस संचालन से करीब 11.26 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया।

  • 737.50 करोड़ खर्च के बावजूद 8 परियोजनाएं अभी भी अधूरी
  • 4.55 करोड़ का वेस्ट मैनेजमेंट मॉड्यूल 3 साल से बेकार
  • 5.91 करोड़ के स्मार्ट स्कूल उपकरण बिजली बिल के कारण बंद
  • 6.20 करोड़ की ब्याज हानि; 19.06 करोड़ अव्ययित राशि वसूली लंबित

स्मार्ट फीचर्स की विफलता
दून इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर : एंड-डिवाइसेज की केवल 28-73त्न उपलब्धता
पर्यावरण सेंसर : 2.62 करोड़ की बर्बादी, 12 मानकों में से केवल 6 को माप सकते हैं
स्मार्ट पोल : 130 में से केवल 27 स्थापित, अधिकांश फीचर्स गैर-कार्यशील

वित्तीय अनियमितताएं : पैसे की बर्बादी

पीएमसी को अतिरिक्त भुगतान : 5.19 करोड़
डुप्लिकेट वीआईपी स्टेज : 84.11 लाख का नया मंच
अव्ययित मल्टी यूटिलिटी डक्ट : 3.24 करोड़ की सामग्री
पेनल्टी की कमी : 1.41 करोड़ का अर्थदंड नहीं लगाया

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