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मेडिकल रिपोर्ट समेत मामले से जुड़े मसले उठाए
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह ने चम्पावत सामूहिक बलात्कार प्रकरण पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र लिखते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराये जाने की मांग की है।
डॉ प्रतिमा सिंह ने कहा कि प्रकरण के मुख्य आरोपी के रूप मे सत्ताधारी दल के नेता का नाम सामने आने के उपरान्त पूरे मामले को नया रंग दिया जा रहा है। पुलिस जांच पर कई प्रकार का संदेह पैदा हो रहा है। इस हेतु सामूहिक बलात्कार की निष्पक्ष जांच कराया जाना और पीड़िता तथा उसके परिवार की सुरक्षा प्रदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
पत्र में कहा है कि कथित पीड़िता के 70 वर्षीय पिता जो दिव्यांग हैं तथा बिस्तर पर है। लड़की आइस क्रीम शॉप पर जॉब करती है।
पुलिस अगर बोल रही है कुछ हुआ नहीं साजिश थी फिर एफआईआर में क्या लिखा गया? मेडिकल क्यों हुआ मेडिकल में क्या निकला?
रेप पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने क्या बयान दिया? ये पुलिस ने जारी कैसे कर दिया?, एक बार एफआईआर हो गई तो पुलिस कैसे अपने निर्णय को सुना सकती है जब तक कोर्ट में मैटर ट्रायल पर नहीं जाएगा।
सीएमओ चंपावत का कहना है कि पीड़िता का मेडिकल 6 मई को सुबह 7 बजे महिला चिकित्सकों द्वारा किया गया था। शरीर पर कोई चोट, संघर्ष के निशान नहीं हैं। पैरों पर रस्सी के निशान भी नहीं है। हाथ पर एक नीला निशान है जो तीन दिन पुराना है । अंदरूनी जाँच में भी कोई दुष्कर्म के साक्ष्य नहीं है। सीएमओ ने बताया हमने जाँच के किए स्वाब सैंपल, कपड़ों की जाँच के बाद उन्हें सील करके पुलिस को दिया है।
जबकि नाबालिग पीड़िता के पिता की तहरीर के अनुसार पीड़िता पर हथियार से दबाव बनाया गया था ।
कई बार धमकी, डर और दिए गए नशे के कारण पीड़ित संघर्ष नहीं कर पाता और शायद इसलिए शरीर पर संघर्ष के निशान नहीं मिलते, इसका मतलब यह नहीं की दुष्कर्म नहीं है। इसको लेकर कोर्ट के आदेशों में क्लियर गाइडलाइंस हैं।
क्या महिला चिकित्सकों ने नाबालिग पीड़िता से पूछताछ की? की कब क्या क्या हुआ? क्या मजिस्ट्रेट और महिला चिकित्सकों के सामने पीड़िता के बयान मेल खाते हैं? क्या नाबालिग पीड़िता बयान देने की स्थिति में थी? यह सवाल हमेशा राज रहेगा कि नाबालिग पीड़िता के पिता और भाई ने जो लिखा है वो क्या था? क्या एक 70 साल का बीमार व्यक्ति भी साजिश में शामिल हो सकता है?
क्या एक लड़की जो मेहनत करके अपने पिता का इलाज करवा रही है और पढ़ाई भी कर रही है वह प्रलोभन में आ सकती है की इतना बड़ा नाटक रच दे? यह जानते हुए की सच सामने आ गया तो समाज बहिष्कार भी कर सकता है, क्या इतनी बड़ी साजिश रच सकती है?
डॉ प्रतिमा सिंह ने मांग की है कि चम्पावत प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाय जिससे प्रदेश में बढते महिला अपराधों पर अंकुश लग सके।
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