विवादित कंपनियां भी चार्टर टेंडर हथियाने की फिराक में

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अविकल उत्तराखंड

देहरादून। उत्तराखंड के संवेदनशील एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को सख़्ती से लागू करवाये जाने से खफ़ा कुछ कंपनियां पात्रता शर्तों की व्याख्या तथा नियामकीय निष्पक्षता को तोड़ने पर आमादा होती जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में उत्तरखण्ड के एविएशन ने यात्रियों को सुरक्षित हवाई यात्रा के लिए स्प्ष्ट प्राविधान किया था कि राज्य की दुर्गम इलाकों में उच्च जोखिम वाले हवाई मार्ग पर उन्हीं कंपनियों को शामिल किया जाय जिनका क्रैश इतिहास न हो। प्रत्येक ऑपरेटर के लिए कड़े सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है बनाया गया था।

विवाद का केंद्र उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) द्वारा जारी हेलीकॉप्टर चार्टर ऑपरेटरों के पंजीकरण हेतु निर्धारित दिशा-निर्देश हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी ऑपरेटर के लिए पिछले दो वर्षों का दुर्घटना-मुक्त संचालन रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण पात्रता शर्त है।

इन निविदा से क्रैश इतिहास रखने वाले ऑपरेटर अब उत्तराखण्ड के एविएशन विभाग को आँखे दिखा कर इन चार्टर्स सेवाओं के टेंडर को अपने पक्ष में करने के लिए दवाब बनाने में जुटी हुई है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध क्रैश रिकॉर्ड वाली कंपनी भी चार्टर्स टेंडर प्रोसेस को प्रभावित करने की कोशिश में लगी है। एविएशन में दर्ज आकड़ो के अनुसार
2 अक्टूबर 2024 में हेलीकॉप्टर VT-EVV के क्रैश में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
21 अगस्त 2019 को भी हेलीकॉप्टर VT-HDX क्रैश में तीन लोगों मौत की आगोश में समा गये थे।
इसी तरह 18 अगस्त 2023 चिन्यालीसौड़ में हेलीकॉप्टर VT-HFX की लैंडिंग के दौरान गिर गया था। वर्ष 2022 के संचालन पर नियामकीय हस्तक्षेप के तहत अस्थायी निलंबन की कार्रवाई किये जाने के रिकार्ड मौजूद है। इतना ही नहीं उत्तरखण्ड में ही वर्ष 2025 में केदारनाथ सेक्टर में संचालित एक उड़ान को लेकर आरोप लगाए गए कि एक हेलीकॉप्टर ने बिना पूर्व अनुमति संचालन किया, जिसके बाद सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। हेरीटेज नाम की कंपनी को एक मामले में कंपनी के निदेशक को जेल तक जाना पड़ गया था।

वर्ष 2018 के कथित हेलीकॉप्टर टिकटिंग फ्रॉड मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में
रुद्रप्रयाग की जिला अदालत द्वारा पहले उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
बाद में सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी हालांकि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें छाती दर्द के कारण अस्पताल में रखा गया था।

सूत्रों के अनुसार उपरोक्त रिकॉर्ड के बावजूद चार्टर संचालन में भागीदारी हेतु पात्रता शर्तों में ढील देने का दवाव और पुनर्व्याख्या के कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं।
हाल के समय में संबंधित ऑपरेटर का नाम कथित रूप से कुछ बाहरी व्यावसायिक हितों, विशेषकर रियल एस्टेट/बिल्डर लॉबी, से भी जोड़ा जा रहा है ।
एविएशन और विधि विशेषज्ञों के अनुसार
उत्तराखंड जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर परिणाम ला सकता है।
यदि पात्रता शर्तों में ढील दी जाती है, तो भविष्य में किसी दुर्घटना की स्थिति में नियामक संस्थाओं की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर UCADA या संबंधित ऑपरेटर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उठते सवालों के मद्देनज़र यह मामला एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करता है, ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और एविएशन सुरक्षा मानकों पर जनविश्वास बना रहे।

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