संस्कृतिकर्मी प्रो.पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए

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अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में मंगलवार को आयोजित सादे किंतु गरिमामय समारोह में इस वर्ष का इंद्रमणि बडोनी सम्मान उत्तराखंड की प्रख्यात संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद और लोक के चितेरे प्रो. दाताराम पुरोहित को दिया गया। इंद्रमणि बडोनी पुरस्कार का प्रशस्ति वाचन गढ़वाली की विख्यात कवयित्री श्रीमती बीना बेंजवाल ने किया। समारोह की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने की, जबकि इस मौके पर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के लोक की वाणी देने वाले गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी थे। डोईवाला डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश जोशी मुख्य वक्ता थे। वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शास्त्री, रंगकर्मी बाल कृष्ण नौटियाल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक संस्कृति व कला निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने भी समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन गिरीश बडोनी ने किया। इंद्रमणि बडोनी चैरिटबल फाउंडेशन पिछले चार वर्ष से लगातार यह सम्मान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को प्रदान करता आ रहा है। इससे पूर्व बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी, नरेंद्र सिंह नेगी आदि हस्तियों को यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है।
मुख्य वक्ता डॉ. राकेश जोशी ने अपने संबोधन में डॉ. पुरोहित के जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह नेगी ने डॉ. पुरोहित के उत्तराखंड की लोक संस्कृति के लिए दिए गए योगदान को सराहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेखा डंगवाल ने डॉ. पुरोहित से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए साथ ही पहाड़ के गांधी स्व. इंद्रमणि बडोनी के योगदान का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यदि इंद्रमणि बडोनी न होते तो आज उत्तराखंड भी न होता। अफसोस यह है कि वे समय से पहले चले गए, वरना उत्तराखंड की दशा और दिशा कुछ और होती, जैसा वे चाहते थे। प्रो. सुरेखा डंगवाल ने प्रो. पुरोहित के लोक संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का भी जिक्र किया।
स्व. इंद्रमणि बडोनी कलावंत भी थे। वे राजनेता से पहले रंगकर्मी थे। चाहे दिल्ली में राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर केदार नृत्य की प्रस्तुति हो या माधो सिंह भण्डारी भाव नाटिका का प्रस्तुतीकरण हो, रामलीला या ढोल को समाज के पुनर्स्थापित करना हो, हर विधा में उन्होंने योगदान दिया। माधो सिंह भण्डारी भाव नाटिका में उनके साथ सूत्रधार की भूमिका निभाने वाले चंपू हुड़क्या का किरदार निभाने वाले बाल कृष्ण नौटियाल भी इस मौके पर अपनी बात साझा कर गए। उन्होंने श्रोताओं को कई प्रसंग सुनाए।
इस मौके पर रियर एडमिरल ओ.पी. एस. राणा, डॉ. नंदकिशोर हटवाल, रमाकांत बेंजवाल, एस.पी. सेमवाल, अनिल नेगी, चंद्रशेखर तिवारी, बद्रीश छावड़ा, श्रीमती गीता नौटियाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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