चेतन हत्याकांड के विरोध में दून में प्रदर्शन

चेतन हत्याकांड के विरोध में दून में प्रदर्शन
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विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

देहरादून। टिहरी जनपद के लंबगांव क्षेत्र में 18 वर्षीय दलित युवक केतन की बर्बर हत्या के विरोध में शुक्रवार को उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रेषित किया।

ज्ञापन में घटना की निष्पक्ष, समयबद्ध एवं उच्चस्तरीय जांच कर सभी दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि प्रारंभिक तथ्यों से यह मामला केवल हत्या का नहीं बल्कि जातीय घृणा, सामाजिक वर्चस्व और अमानवीय क्रूरता का प्रतीत होता है।

आरोप है कि 8 जून की रात केतन को बुलाकर उसके साथ गंभीर मारपीट और अमानवीय यातनाएं दी गईं। गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़े गए केतन की बाद में मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है तथा दलित समुदाय सहित समाज के संवेदनशील वर्गों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रेम करना कोई अपराध नहीं है और किसी भी युवक को उसकी जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि अथवा व्यक्तिगत संबंधों के कारण प्रताड़ित करना और उसकी हत्या कर देना सभ्य समाज पर कलंक है। उत्तराखंड जैसे राज्य में इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक ताने-बाने, संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चुनौती हैं।

ज्ञापन में मांग की गई कि मुख्य आरोपी के साथ-साथ घटना में शामिल सभी सहयोगियों, सह-अभियुक्तों तथा साक्ष्य छिपाने या अपराध में सहायता करने वाले व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाए और उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही मामले की सुनवाई को फास्ट ट्रैक न्यायालय में संचालित कर पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।

संगठनों ने यह भी मांग की कि पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षा, कानूनी सहायता तथा पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए ताकि वे किसी प्रकार के भय, दबाव अथवा सामाजिक उत्पीड़न का सामना न करें। ज्ञापन में कहा गया कि शासन और प्रशासन का दायित्व है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराए तथा कमजोर एवं वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधियों ने बताया कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के कारण जिलाधिकारी कार्यालय में कोई सक्षम अधिकारी उपलब्ध नहीं था। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद भी जब कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा तो उपस्थित लोगों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की तथा जिलाधिकारी कार्यालय परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि एक दलित युवक की निर्मम हत्या जैसे गंभीर मामले में प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही दिखाई देनी चाहिए थी।
बाद में आंदोलनकारियों के लगातार आग्रह और दबाव के बाद अपर सिटी मजिस्ट्रेट को मौके पर बुलाया गया, जिनके माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि केतन हत्याकांड केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार पर सीधा हमला है। यदि दोषियों के विरुद्ध कठोर और उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई नहीं हुई तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा तथा ऐसे अपराधों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए।

ज्ञापन सौंपने एवं विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रमुख रूप से कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, नवीन मित्तल, आर.सी. यादव, विमला, चंद्रा, पदमा गुप्ता, यशवीर आर्य, पंकज सिंह क्षेत्री, शांति बिष्ट, शांति नेगी, कांति कोहली, रानी नेगी, पार्वती बिष्ट, यशवीर आर्य, स्नेह लता शाह, रघुनाथ आर्या, मीना शाह, विक्रम सिंह, जसपाल सिंह, सुरेश नेगी, यदुवीर पंवार, मीना राणा, सुशीला राणा, प्रेमलता बहुगुणा, दीपा नेगी, पूजा नौटियाल, कविता देवी एवं पार्वती कुड़ियाल उपस्थित रहे।

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