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अविकल उत्तराखंड
रामनगर। सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम के तहत पाठ्यक्रम निर्माण समिति की टीम ने सोमवार को सांवल्दे स्थित लगभग 200 बीघे के फलोद्यान का भ्रमण कराया। जोतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले सायंकालीन विद्यालय से जुड़े 30 से अधिक बच्चों ने इस दौरान आम, कटहल, लीची, अमरूद और आंवले की विभिन्न प्रजातियों, वृक्षों की देखभाल तथा सिंचाई व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की।
फल उत्पादक अंकित बेलवाल ने बच्चों को बागवानी के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराते हुए बताया कि वानिकी के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेड़ के रोपण का एक निर्धारित स्थान होता है। उन्होंने कहा कि आम और लीची के बागों के बाहरी हिस्से में कटहल के पेड़ लगाए जाते हैं, जिससे आंधी और तूफान के दौरान तेज हवाओं का प्रभाव कम हो और फलदार वृक्षों को नुकसान न पहुंचे।

बेलवाल ने बताया कि देश में आम की एक हजार से अधिक किस्में पाई जाती हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आम से अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आम की नई किस्मों का विकास कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में किया जाता है।
शाम के सत्र में विद्यार्थियों ने भ्रमण के अनुभवों के आधार पर चित्र बनाए और अनुभव लेखन किया। बच्चों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए एक-दूसरे के कार्यों की सराहना भी की।
एससीईआरटी देहरादून में विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य रह चुके मदन पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान स्कूल प्रणाली में प्रत्यक्ष अनुभवों के अवसर सीमित हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी भ्रमण और अवलोकन के माध्यम से सीखते हैं तथा बाद में उन अनुभवों को लेखन और चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी बनती है।
कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों से सायंकालीन विद्यालय के लिए तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम को समृद्ध करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर नवेंदु मठपाल, मदन पाण्डेय, अंकित बेलवाल, नंदराम आर्य, रितु बेलवाल, वंदना और सुमित कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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