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योग, ध्यान और गंगा आरती से जुड़कर शांति व आत्मिक संतुलन का दिया संदेश
अविकल उत्तराखंड
ऋषिकेश। कन्नड़ एवं तमिल फिल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री संचिता शेट्टी इन दिनों परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए प्रवास पर हैं। आधुनिक जीवन की चकाचौंध और भागदौड़ के बीच उन्होंने आध्यात्मिक जीवन शैली को अपनाने का संदेश दिया।
परमार्थ निकेतन में प्रवास के दौरान संचिता शेट्टी ने योग, ध्यान, मौन, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को आत्मसात किया। इस दौरान उन्होंने स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में जीवन, आत्मा, सफलता, मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन जैसे विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जिसमें मन को शांति और संतुष्टि प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को करियर के साथ-साथ संस्कार और आत्मिक संतुलन की भी आवश्यकता है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि आध्यात्मिकता संसार से दूर भागना नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानकर समाज और मानवता के लिए सकारात्मक ऊर्जा बनना है।

संचिता शेट्टी ने कहा कि परमार्थ निकेतन आत्मजागरण और आंतरिक शांति का दिव्य केंद्र है। यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि वास्तविक शांति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने भीतर होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव और अकेलेपन जैसी समस्याओं से उबरने के लिए योग, ध्यान और आध्यात्मिकता अत्यंत आवश्यक हैं।
प्रवास के दौरान उन्होंने परमार्थ निकेतन में आयोजित मासिक श्रीराम कथा में सहभाग कर भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा के संदेशों को आत्मसात किया। साथ ही विश्व शांति हवन में आहुतियां अर्पित कर मानवता और प्रकृति के कल्याण की कामना की तथा मां गंगा के तट पर आयोजित दिव्य गंगा आरती में भी सहभाग किया।
परमार्थ निकेतन का आध्यात्मिक वातावरण, हिमालय की ऊर्जा और गंगा की पवित्रता देश-विदेश से आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन दर्शन से जोड़ रही है। संचिता शेट्टी का यह आध्यात्मिक प्रवास आधुनिकता और आध्यात्मिकता के संतुलित समन्वय का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।
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