धराली आपदा: तेलगाड की झील अब भी बनी खतरा, मलबे में तबाह हुआ सेना कैंप; नौ सैनिक आज भी लापता !

धराली आपदा: तेलगाड की झील अब भी बनी खतरा, मलबे में तबाह हुआ सेना कैंप; नौ सैनिक आज भी लापता !
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आज ही के दिन पिछले वर्ष खीर गंगा में आए मलबे के सैलाब में 70 लोग खो गए थे। नदी का जलस्तर बढ़ने पर प्रभावितों को घर खाली करने को कहा गया। तेलगाड के मुहाने के समीप भूस्खलन के कारण एक झील बन गई थी। इसलिए अधिक बरसात में तेलगाड में इस झील के कारण दोबारा बढ़ी तबाही हो सकती है।

बीते वर्ष पांच अगस्त को धराली की खीर गंगा में आई तबाही के करीब आधे घंटे बाद उससे करीब तीन किमी की दूरी पर स्थित हर्षिल की तेलगाड में भी आए मलबे ने सेना कैंप में आपदा का कहर बरपाया। उसमें करीब नौ सैनिक लापता हो गए थे। साथ ही तेलगाड से आए मलबे ने भागीरथी का जल प्रवाह रोककर वहां पर करीब डेढ़ किमी लंबी झील बना दी थी। उसके खतरे के कारण एक वर्ष बाद अब हर्षिल गांव के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है।

हालांकि गत माह झील और तेलगाड का जलस्तर बढ़ने के कारण हर्षिल में कटाव होने के कारण आवासीय सहित सरकारी भवनों को खतरा हो गया था। वहां पर जीएमवीएन का एक टिनशेड बहने के साथ ही कटाव के कारण सेना कैंप की ओर से विशालकाय वृक्ष टूटने के कारण नदी का प्रवाह रुकने का खतरा बना हुआ था। स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर वहां पर नदी को चैनलाइज कर अस्थाई सुरक्षात्मक कार्य शुरु किए गए हैं। लेकिन अभी भी खतरा टला नहीं है।

गत वर्ष तेलगाड के मुहाने के समीप भूस्खलन के कारण एक झील बन गई थी। इसलिए अधिक बरसात में तेलगाड में इस झील के कारण दोबारा बढ़ी तबाही हो सकती है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ दल से वहां पर निरीक्षण करवाने की बात कही थी। लेकिन अभी तक वह निरीक्षण भी नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भागीरथी में बनी झील की उचित निकासी और तेलगाड से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते हैं। तो यह भविष्य में हर्षिल के अस्तित्व पर बड़ा खतरा बन सकता है।

आपदा के एक वर्ष बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे

धराली में खीर गंगा आपदा के एक वर्ष बाद भी कई हेक्टेयर भूमि पर मलबा पसरा है। आपदा प्रभावित लोगों का कहना है कि सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रशासन ने केवल नदी को उसके पुराने मार्ग पर मोड़ा है। गत वर्ष पांच अगस्त को खीर गंगा में पानी और मलबे का सैलाब आया था। इस आपदा में बहुमंजिला भवन, गंगोत्री हाईवे, कल्प केदार मंदिर और सेब के बगीचे करीब 25 फीट मलबे में दब गए। आठ स्थानीय निवासियों सहित लगभग 70 लोग लापता हुए थे। उन्हें आज तक शव न मिलने के कारण मृतक घोषित किया गया है। धराली में आज भी चारों ओर मलबा ही दिख रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि खीर गंगा का खतरा अभी टला नहीं है। यदि दोबारा बाढ़ आती है, तो स्थिति भयावह होगी। नदी के दोनों ओर मलबे के विशाल ढेर अभी भी जमा हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और ग्रामीणों की चिंता

ग्राम प्रधान धराली अजय नेगी ने बताया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ नदी का मार्ग बदला गया। गत माह खीर गंगा का जलस्तर बढ़ने पर वैकल्पिक गंगोत्री हाईवे फिर खतरे में आ गया था। प्रशासन ने पुराने धराली में रह रहे करीब 115 लोगों को बरसात में घर खाली करने के नोटिस दिए। ग्रामीणों को बार-बार आपदा के भय से घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सादगी से मनाया गया हारदूधू मेला

आपदा प्रभावित धराली में हारदूधू मेले को सादगी से मनाया गया। पिछले वर्ष खीर गंगा की तबाही में मेले की खुशियां जमींदोज हो गई थीं। जिससे परंपरा निभाते हुए मंगलवार शाम को समेश्वर देवता मंदिर प्रांगण में नाग देवता को दूध भेंट किया गया। पूर्व प्रधान ममता पंवार ने बताया कि ग्रामीणों ने उस आपदा में अपनों को खोया था। उसकी यादें आज भी ताजा हैं। इसीलिए परंपरा निभाई गई। इसमें ग्रामीण मेले के लिए गाय का दूध बचाकर रखते हैं। बुधवार को समेश्वर देवता की पूजा होगी। आपदा मृतकों की आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी। इसके बाद मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए 101 पौधरोपण भी किया जाएगा।

धराली आपदा की पहली बरसी: 70 मृतकों की स्मृति में पाठ-पूजा, 101 पौधे लगाए

उत्तरकाशी के धराली में आपदा की पहली बरसी पर ग्रामीणों ने खीर गंगा में मलबे के रूप में आई तबाही में दबे गांव के आठ लोगों समेत कुल 70 मृतकों की आत्मा की शांति के लिए एकदिवसीय पाठ-पूजा का आयोजन किया। इस दौरान मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए 101 पौधे भी लगाए गए। ग्रामीणों ने कहा कि अब हर वर्ष 5 अगस्त को आपदा स्थल पर पौधरोपण कर दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। कार्यक्रम में पांच पंडितों ने रुद्राष्टक, पितृगयात्री और गीता पाठ कर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

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