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स्थानीय परिवहन को लेकर उठी आवाज
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में प्रयुक्त “कमर्शियल वाहन” शब्द को लेकर पैदा हुए भ्रम और उससे प्रभावित स्थानीय जनता की परेशानियों को लेकर सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल से मुलाकात कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा गया। बैठक में स्थानीय लोगों की आवाजाही, सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और जनजीवन पर पड़ रहे असर को प्रमुखता से उठाया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग देहरादून और हरिद्वार आने-जाने के लिए मिनी बस, टैक्सी, मैक्स वाहन और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर निर्भर हैं। यह मार्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और दैनिक जरूरतों के लिए क्षेत्र की लाइफलाइन बना हुआ है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि इसी विषय पर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग को खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय दिया था।
जनभावनाओं को ध्यान में रख निर्णय लेने का आग्रह
प्रतिवेदन में मांग की गई कि स्थानीय जनता की व्यावहारिक कठिनाइयों और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मामले में संवेदनशील और उदार दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और उनका दैनिक जीवन प्रभावित न हो।
बैठक के दौरान चंद्र प्रकाश गोयल ने भरोसा दिलाया कि सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी स्थानीय लोगों की समस्याओं और जनहित से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से समझते हुए शीघ्र सकारात्मक अनुशंसा करेगी।
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