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एकत्रित कचरे को 15 श्रेणियों में बांटा गया
कचरे से होगी नगर पंचायत की कमाई
अविकल उत्तराखंड
केदारनाथ। नगर पंचायत केदारनाथ ने धाम को प्लास्टिक वेस्ट से मुक्त रखने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
यात्रा के पहले एक सप्ताह में ही पालिका ने करीब एक हजार किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्रित करते हुए, कॉम्पेक्ट कर लिया है। पालिका गीले कचरे के निस्तारण के लिए भी पक्के पिट बनाने जा रही है।
ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार, 22 अप्रैल को खोले गए थे। यात्रा के पहले ही दिन से धाम में तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है, इस कारण धाम में भारी मात्रा में प्लास्टिक वेस्ट पहुंच रहा है, जिसका मुख्य कारण पानी की बोतलें हैं। हालांकि नगर पंचायत केदारनाथ इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही तैयार थी। इसके लिए नगर पंचायत की ओर से धाम में 3 हजार वर्गफिट क्षेत्र में मटीरियल रिकवरी फैसीलिटी स्थापित की गई है। जहां धाम में एकत्रित होने वाले प्लास्टिक वेस्ट और अन्य ठोस कचरे को जमा कर, 15 अलग- अलग श्रेणियों में छांटा जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक वेस्ट, कांच और टिन, कपड़े जैसा कचरा शामिल होता है। यही पर नगर पंचायत की ओर से कॉम्पेक्टर मशीन भी लगाई गई है, जो बोतल आदि प्लास्टिक वेस्ट को पिचकाकर, 30 से 40 किलो की गठरी के तौर पर तैयार कर देती है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि इस तरह पहले एक हफ्ते ही करीब एक हजार किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्रित किया जा चुका है, जिसे अब बेचा जाएगा, इससे नगर पंचायत को राजस्व की भी प्राप्ति होगी।
उन्होंने बताया कि कांच, टिन सहित दूसरे वेस्ट को भी मौके पर ही जमा किया जा रहा है, बाद में इसे भी सोनप्रयाग लाकर कबाड़ के तौर पर बेचा जाएगा। नगर पंचायत की ओर से धाम में दो शिफ्ट में सुबह शाम सफाई कराई जा रही है। इसके लिए 55 सफाई कर्मी नियुक्त किए गए हैं, जबकि यात्रा मार्ग पर दूसरी संस्था द्वारा सफाई कराई जा रही है। इस कारण धाम में स्वच्छता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री कर चुके हैं अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उत्तराखंड आने वाले तीर्थ यात्रियों से सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा न फैलाने की अपील कर चुके हैं। इसी माह दिल्ली – देहरादून एक्सप्रेस वे लोकार्पण के लिए देहरादून पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से की गई अपनी पांच अपील में, पर्यावरण संरक्षण के साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने को भी शामिल किया है।
उत्तराखंड देवभूमि के साथ ही अपने नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री से हमारी विनम्र अपील है कि वो प्लास्टिक वेस्ट या अन्य तरह का कचरा इधर- उधर न डालें। उत्तराखंड सरकार, तीर्थ स्थलों के साथ ही यहां की पवित्र नदियों और पर्वतराज हिमालय के पर्यावरण संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। धामों के साथ ही यात्रा मार्ग पर नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लगातार सफाई कराई जा रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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