हाथ पर गुदा था ‘राजपाल’, लेकिन पहचान न हो सकी; आठ दिन बाद मौत, पुलिस बनी अंतिम सहारा !

हाथ पर गुदा था ‘राजपाल’, लेकिन पहचान न हो सकी; आठ दिन बाद मौत, पुलिस बनी अंतिम सहारा !
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हल्द्वानी में 20 जून को बेहोश मिले व्यक्ति की 27 जून को मौत हो गई। हाथ पर ‘राजपाल’ गुदा होने और पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद कोई परिजन नहीं मिला, जिससे पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार लावारिस के रूप में कर दिया गया।

 

हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र में सड़क पर बेहोशी की हालत में मिले और बाद में मौत के शिकार हुए व्यक्ति की तमाम कोशिशों के बावजूद पहचान नहीं हो सकी। उसके हाथ पर गुदा नाम ‘राजपाल’ भी उसकी पहचान की गुत्थी सुलझाने में मददगार साबित नहीं हुआ। अंत में नियमानुसार पोस्टमार्टम के बाद लावारिस के रूप में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

20 जून को कोतवाली हल्द्वानी क्षेत्र में एक व्यक्ति सड़क पर बेहोशी की हालत में मिला था। 108 एंबुलेंस की मदद से उसे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसने करीब आठ दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। इस पूरे समय उसके पास कोई अपना नहीं था। न हाथ थामने वाला और ना ही कोई हाल पूछने वाला। उसके बाएं हाथ पर ”राजपाल यादव” गुदा था। इसके अलावा उसकी कोई पहचान नहीं थी।

27 जून को उसकी सांसें थम गईं। मौत के बाद भी उसकी पहचान एक पहेली बनी रही। पुलिस ने शव को शिनाख्त के लिए मोर्चरी में रखा और आसपास के थानों से लेकर यूपी तक उसकी फोटो व अन्य जानकारियां भेजीं। पुलिस को उम्मीद थी कि शायद कोई उसे जानता होगा। कोई रिश्तेदार आएगा लेकिन कोई सामने नहीं आया। 72 घंटे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार लावारिस के तौर पर कर दिया।

40 के करीब थी उम्र
युवक की उम्र करीब 40 साल के आसपास जताई जा रही है। उसके हाथ और कमर में चोट थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह यहां मजदूरी करता होगा। इसके अलावा उसके किसी बीमारी से ग्रसित होने का भी अंदेशा है।

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