ऊपरी गंग नहर को ही अपर गंगा कैनाल कहा जाता है। इससे अलीगढ़ के 72 रजबहा और माइनर जुड़े हुए हैं, जिनमें इसका पानी पहुंचता है। मध्य गंगा नहर से 60 रजबहा और माइनर को पानी मिलता है। इस तरह से 132 रजबहा और माइनर तक पानी पहुंचाया जाता है।
खरीफ के सीजन में धान की फसल को पानी देने की तैयारी शुरू हो गई है। ऊपरी गंग नहर और मध्य गंगा नहर से जिले के 132 रजबहा और माइनरों को पानी दिया जाएगा। इस वक्त रजबहा और माइनरों की सफाई की जा रही है, ताकि हेड से टेल तक सभी किसानों को पानी मिल सके। ऊपरी गंग नहर मानव निर्मित देश की तीसरी सबसे पुरानी नहर है, जिसका निर्माण 1853 में हुआ था। यह अलीगढ़ की खेतों के लिए जीवनदायिनी के रूप में बहती है।
437 किमी लंबी ऊपरी गंगा नहर का निर्माण सन 1854 में पूरा हुआ था। यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरती है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में इंजीनियर सर प्रोबी थॉमस कॉटली के नेतृत्व में 16 अप्रैल 1842 को शुरू हुआ और अप्रैल 1854 में पूरा हुआ। यह उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित भीमगोड़ा बैराज से गंगा के दाहिने किनारे से निकलती है। उत्तराखंड में हरिद्वार और रुड़की से होते हुए यूपी में प्रवेश करती है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर से होते हुए अलीगढ़ पहुंचती है। यहां से दो भागों में बट जाती है।
