Rishikesh News: आपदा और बजट की मार, चार साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी जुलेड़ी पंपिंग योजना !

Rishikesh News: आपदा और बजट की मार, चार साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी जुलेड़ी पंपिंग योजना !
Share This News:

 

13 करोड़ रुपये की लागत से 28 गांवों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या दूर करने के लिए बनाई जा रही जुलेड़ी पंपिंग योजना अधर में लटकी हुई है। अक्तूबर 2022 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना से वर्ष 2024 तक ग्रामीणों के घरों में नल से पानी पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक देरी के चलते चार साल बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल सकी है।

योजना को सबसे बड़ा झटका 20 अगस्त 2023 की आपदा में लगा, जब बैरागढ़ स्थित जल शोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लांट) मलबे की चपेट में आ गया। इसके बाद नई भूमि के चयन में ही करीब दो वर्ष का समय निकल गया। आखिरकार आईआईटी रुड़की से नई जगह पर टैंक निर्माण का नक्शा स्वीकृत होने के बाद अक्तूबर 2025 में बैरागढ़ में 170 किलोलीटर क्षमता के टैंक का निर्माण शुरू कराया गया।
वर्तमान में पंप हाउस और पंप ऑपरेटर का आवास भी तैयार हो चुका है। विभागीय अधिकारियों ने दावा किया था कि अप्रैल 2026 तक योजना पूरी कर ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी, लेकिन यह समय सीमा भी बीत चुकी है और योजना अब भी अधूरी है।
इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। योजना के तहत 800 से अधिक स्टैंड पोस्ट के माध्यम से 28 गांवों में हर घर तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी अधिकांश ग्रामीण हैंडपंप, प्राकृतिक जलस्रोतों या टैंकरों पर निर्भर हैं। जुलेड़ी, दिउली समेत कई गांवों में मई माह से नियमित रूप से टैंकरों के जरिये पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

—
इन गांवों को मिलेगा योजना का लाभ

योजना से जुलेड़ी, भेलडूंगा, पैन्या, कुमराणा, उमड़ा, बिंजाखेत, मजेंडी, ढौसण, दिउली, मलेल गांव, कोठार, ईडिया, आमड़ी मल्ली, आमड़ी तल्ली, गयोन्था, बंसटोला, डौरण, चमनपुर, धमांद, केशुबाड़ी सहित 28 गांव लाभान्वित होने हैं।

बजट के अभाव में जुलेड़ी पंपिंग योजना निर्माण कार्य धीमा हुआ है। प्राथमिकता से जुलेड़ी पंपिंग योजना के लिए बजट की मांग की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *