Rudraprayag Gurdwara Clash: खुफिया तंत्र पर सवाल, तीन दिन पहले पहुंचे सात निहंग, चुपचाप बनती रही रणनीति !

Rudraprayag Gurdwara Clash: खुफिया तंत्र पर सवाल, तीन दिन पहले पहुंचे सात निहंग, चुपचाप बनती रही रणनीति !
Share This News:

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम से चल रहा निहंगों का हाई वोल्टेज ड्रामा जारी है। निहंग प्रशासन से वार्ता के बाद मानें। लेकिन इस पूरे प्रकरण से खुफिया तंत्र पर सवाल उठे रहे हैं।

देवभूमि के शांत वातावरण में शनिवार शाम नगरासू गुरुद्वारे में हुए घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद भी खुफिया तंत्र को उन निहंगों की गतिविधियों की भनक क्यों नहीं लगी, जो तीन दिन तक गुरुद्वारे में रहकर अपनी रणनीति तैयार करते रहे।

गुरुद्वारा प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार सात निहंग तीन दिन पहले नगरासू पहुंचे थे। इस दौरान वे श्रद्धालुओं और सेवादारों की तरह गुरुद्वारे में रह रहे थे। प्रबंधन के साथ उनकी कई दौर की बातचीत भी हुई। बताया जा रहा है कि वे अपने साथ बड़ी संख्या में लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की मांग कर रहे थे जब इस पर सहमति नहीं बनी तो विवाद शुरू हो गया।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों का दावा है कि शुरुआती विवाद के बाद निहंगों ने माफी भी मांगी थी। इससे किसी को अंदेशा नहीं हुआ कि वे आगे कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। बाद में अचानक उन्होंने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर कब्जा जमा लिया और हालात तनावपूर्ण हो गए।लंबे समय तक इसी गुरुद्वारे में सेवादार रह चुके

सूत्रों के अनुसार सात निहंगों में से एक व्यक्ति पहले भी लंबे समय तक इसी गुरुद्वारे में सेवादार रह चुका है। उसे गुरुद्वारे की आंतरिक व्यवस्था और भवन की पूरी जानकारी थी। माना जा रहा है कि इसी वजह से वे कम समय में ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने और वहां डटे रहने में सफल रहे।

घटनाक्रम का एक और पहलू सोशल
मीडिया से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि कर्णप्रयाग प्रकरण को लेकर भावनाएं भड़काने वाले संदेश और पोस्ट भी प्रसारित किए गए। इनमें 25 जून को कर्णप्रयाग पहुंचने का आह्वान भी किया गया था। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां संभावित विवाद का आकलन नहीं कर सकीं। नगरासू गुरुद्वारे में हुई घटना के बाद स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का मानना है कि सतर्कता बरती जाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *