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कुपोषण-मुक्त भारत की दिशा में निर्णायक पहल- त्रिवेन्द्र
अविकल उत्तराखंड
देहरादून/नई दिल्ली | हरिद्वार के सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने संसद में सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाकर कुपोषण-मुक्त भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान की। उन्होंने उच्च निष्पादन करने वाली ग्राम पंचायतों की पहचान, चयन प्रक्रिया, रैंकिंग, प्रोत्साहन, मापनीय परिणामों एवं विभिन्न राज्यों और जिलों- विशेषकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों में इसके प्रभाव को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) द्वारा इसके लिखित उत्तर में सदन को यह अवगत कराया गया कि यह अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 26 दिसंबर 2024 को प्रारंभ किया गया। इसके अंतर्गत पोषण ट्रैकर ऐप के डेटा के आधार पर प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की अधिकतम 10% ग्राम पंचायतों को नामांकित कर देश-भर की शीर्ष 1,000 सुपोषित ग्राम पंचायतों को चयनित किया जाना है।
चयनित पंचायतों को प्रति पंचायत ₹1 लाख का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा, जिससे आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं और सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ किया जाएगा। मूल्यांकन पूरी तरह परिणाम-उन्मुख एवं डेटा-आधारित होगा, जिसमें बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार को प्रमुख मानक बनाया गया है।
सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस अवसर पर कहा कि ग्राम पंचायतें ही कुपोषण-मुक्त भारत की असली धुरी हैं। डेटा-आधारित, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक मॉडल के माध्यम से पोषण सुधार की यह पहल जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव लाएगी।
उनका यह हस्तक्षेप न केवल हरिद्वार संसदीय क्षेत्र बल्कि देशभर की ग्राम पंचायतों में पोषण, स्वास्थ्य और मानव विकास के लिए एक नई दिशा तय करता है।
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