शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सेवा से बर्खास्त

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चालीस साल पहले 18 साल से कम आयु में बने शिक्षक को नौकरी से हटाया

“अविकल उत्तराखंड” ने अप्रैल 2026 में किया था खुलासा

अविकल थपलियाल

कोटद्वार/देहरादून। अठारह साल से कम उम्र में सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी हासिल करने वाले शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। शिक्षक की चालीस साल पहले पौड़ी जिले के कोटद्वार में बतौर शिक्षक की नौकरी लगी थी। उस समय अभ्यर्थी की।उम्र 18 साल से कम थी।

पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि विभागीय जांच के बाद राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य नफ़ीस अहमद को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

गौरतलब है कि “अविकल उत्तराखण्ड” ने उत्तर प्रदेश के जमाने में शिक्षा विभाग के इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।  प्रधानाचार्य नफ़ीस अहमद 2023 में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

बर्खास्तगी का आदेश मिलने के बाद नफ़ीस अहमद के हाईकोर्ट की शरण लेने की भी खबर है।

2023 में मिला था शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार

यह था मामला

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालक नगर क्षेत्र कोटद्वार में कार्यरत शिक्षक नफीस अहमद की नियुक्ति के संबंध में लंबी जांच चली। विभागीय जांच में शिकायत सही पाई गई। और जॉच अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 1985 में नियुक्ति के समय नफ़ीस अहमद की आयु 17 साल 11 महीने व 11 दिन थी। जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के अनुसार नियुक्ति के समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। जांच के बाद पौड़ी के जिला शिक्षाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट देहरादून में तत्कालीन प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी को भेज दी थी।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस मामले में पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके तहत उप शिक्षा अधिकारी दुगड्डा को जांच अधिकारी नामित किया गया था। जांच रिपोर्ट 12 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की गई, जिसमें उक्त तथ्य की पुष्टि हुई।

जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि.) पौड़ी गढ़वाल द्वारा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि संबंधित शिक्षक की नियुक्ति निर्धारित आयु से पहले किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। (नीचे लगे link को कीजिये क्लिक)

पत्र में यह भी उल्लेख किया यय था कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के अनुसार नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। ऐसे में कम उम्र में की गई यह नियुक्ति नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने 9 मार्च के इस पत्र में निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा से इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने का अनुरोध किया था ताकि प्रकरण का निस्तारण किया जा सके।

इस मामले की शिकायत नगर निगम पार्षद विपिन डोबरियाल ने की थी।

Pls clik-देखें क्या है असल मसला

उमरिया 18 से कम और मिल गयी सरकारी नौकरी

प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर विभागीय शिकंजा

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