खुल गए फ्यूंलानारायण के कपाट, दो महीने तक होगी पूजा अर्चना

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पुरुष के साथ महिला पुजारी भी होती है नियुक्त

भगवान फ्यूंलानारायण की पूजा का अधिकार सिर्फ महिला पुजारी को

दिनेश शास्त्री

गोपेश्वर। उर्गम घाटी यानी कल्प क्षेत्र स्थित भगवान फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट श्रावण संक्रांति पर विधि विधान के साथ खुल गए। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पुरुष पुजारी के साथ महिला पुजारी भी भगवान नारायण की सेवा करती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है। लाेकविश्वास के अनुसार भगवान नारायण को सातूं वाड़ी का भोग सबसे प्रिय है। इस दौरान नियमित रूप से भगवान को यह भोग लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में समुद्र तल से दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हर वर्ष श्रावण संक्रांति को खुलता है और नंदा अष्टमी की अंतिम पूजा के बाद नवमी तिथि को अगले वर्ष तक के लिए कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
यह परंपरा हजारों साल से चला आ रही है।

भेंटा गांव के पूर्व प्रधान और सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह नेगी ने बताया कि फ्यूंलानारायण मंदिर में भगवान नारायण के साथ महालक्ष्मी और जय – विजय द्वारपाल के रूप में विराजमान हैं भगवान विष्णु चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं। इनके पार्षद क्षेत्रपाल घंटाकर्ण, नंदा – सुनंदा देवियों की पूजा के साथ जग और वन देवियों की पूजा की जाती है।

ऋषि परंपरा के अनुसार यहां की पूजा की जाती है। कल्प क्षेत्र के भरकी, भेंटा, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांव के लोगों द्वारा हर वर्ष एक परिवार की बारी के हिसाब से यहां पुजारी नियुक्त किया जाता है। इस वर्ष नारायण के पुजारी अशीष पंवार और महिला पुजारी आनंदी देवी हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में चारों ओर ओर सुंदर बुग्याल और घने जंगलों के बीच में हरीतिमा ओढ़े जंगलों के मध्य में यह मंदिर बड़ा सुंदर दिखता है। यहां भगवान नारायण के श्रृंगार का अधिकार केवल महिला पुजारी को है।

मंदिर के कपाट खुलने के मौके पर भरकी के प्रधान चंद्र मोहन सिंह, पूर्व प्रधान दुर्लभ सिंह रावत, पूर्व प्रधान लक्ष्मण सिंह, पंचनाम देवता के पुजारी अब्बल सिंह पंवार, आचार्य मनोहर प्रसाद सेमवाल, फ्रेंड्स ग्रुप के 25 से अधिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर सजाने का काम किया। महिला समिति के सचिव रघुवीर सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह पंवार, बलवंत सिंह नेगी, मेला समिति के मेला समिति के कोषाध्यक्ष नंद सिंह नेगी, दीपा देवी आशुतोष नेगी जितेंद्र पवार जितेंद्र कंडवाल, किशन सिंह, रणजीत सिंह आदि लोग आदि लोग उपस्थित थे।

यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग बदरीनाथ की अति निकट हैलंग तक 240 किमी की दूरी बस, कार या मोटरसाइकिल से पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के के बाद आप जीप कार से भरकी गांव पहुंच सकते हैं। इसकी दूरी 14 किलोमीटर के लगभग है और यहां से 5 किलोमीटर पैदल दूरी तय करके नारायण धाम में पहुंच सकते हैं। यह रुकने के लिए सामान्य रूप से मंदिर प्रांगण ही उपलब्ध है। भोजन के लिए यहां भंडारे की व्यवस्था हो जाती है। यात्रा करें तो अवश्य अपने साथ गर्म कपड़े रखें। भरकी गांव से गाइड मिल जाते हैं।

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