प्रहलाद दा के साथ दो जुदा अहसास, पर वो ही प्रभावी बात

प्रहलाद दा के साथ दो जुदा अहसास, पर वो ही प्रभावी बात
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हाल ही में रिलीज हुए हैं प्रहलाद मेहरा के दो गाने-जुन्याली रात और मन की बात

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वरिष्ठ पत्रकार विपिन बनियाल की कलम से

अविकल उत्तराखंड

प्रहलाद मेहरा को दुनिया से विदा लिए करीब दो साल हो गए हैं, लेकिन उनके गीतों की ताजगी अब भी बरकरार है। पिछले दिनों उनके दो गाने सामने आए हैं। मन की आग और जुन्याली रात। वैसे, तो दोनों गानों का मिजाज एकदम अलग है, लेकिन प्रहलाद दा की आवाज और उनकी लेखनी का जादू दोनों जगह एक जैसा प्रभाव छोड़ रहा है। इन दो गानों के जरिये प्रहलाद दा एक बार फिर याद आ रहे हैं और मन ये ही कह रहा है-काश! प्रहलाद दा इतनी जल्दी ना जाते।

दरअसल, अपनी मृत्यु से पहले ही प्रहलाद मेहरा ने अपने कई गाने रिकार्ड करा लिए थे। इन्हें धीरे-धीरे रिलीज किया जाना था। संगीतकार रणजीत सिंह के अनुसार-प्रहलाद दा के रिकार्ड कराए गए गानों को अब एक-एक करके रिलीज किया जा रहा है। यह गाने उत्तराखंडी लोक संगीत के लिए धरोहर समान हैं।

अब सबसे पहले प्रहलाद दा के जुन्याली रात वाले गाने की बात। जुन्याली रात यानी चांदनी रात। जुन्याली रात को केंद्र में रखकर कई सारे पहाड़ी गाने बने हैं। नेगीदा के वा जुन्याली रात गाने की तो बात ही अलग है। प्रहलाद दा ने भी जुन्याली रात पर फोकस करते हुए एक बेहतरीन प्रेम गीत हमें दिया है। अपने जीते-जी कई मौकों पर उन्होंने यह गीत गुनगुनाया, लेकिन चांदनी एंटरप्राइजेज के नवीन टोलिया इसे जिस भव्य ढंग से सामने लाए हैं, वह सुखद है।

प्रहलाद मेहरा के साथ इस गाने को चंद्रकला देउपा ने बहुत शानदार ढंग से गाया है। प्रहलाद दा ने इसे लिखा भी बहुत प्यारा है और बाकी का काम बखूबी पूरा किया है संगीतकार पवन गुसाईं ने। खास बात यह है कि इस गाने का फिल्मांकन बहुत खूबसूरत है। गोविंद नेगी का डायरेक्शन हो या कैमरा वर्क, दोनों कमाल हैं। स्क्रीन पर नेयो फरस्वाण खूब चमके हैं। हर अच्छे प्रोजेक्ट में गोविंद नेगी और नेयो फरस्वाण की उपस्थिति मानो अनिवार्य सी हो गई है। गाने में नेयो फरस्वाण के अपोजिट श्वेता शर्मा हैं, जिनका काम अच्छा है। कुल मिलाकर यह प्रेम गीत मन में तरंग पैदा करता है।

ये तो हुई मन में तरंग की बात, अब मन की आग की बात भी कर ली जाए, जो कि प्रहलाद दा का दूसरा गाना है। यह मन की आग एक ऐसे बूढे़ व्यक्ति की बेबसी का चित्रण है, जो परिवार जनों की उपेक्षा के चलते पहाड़ पर अकेला रह गया है। प्रहलाद दा के खूबसूरत बोल और उनकी पहाड़ी आवाज के साथ संगीतकार रणजीत सिंह ने पूरा न्याय किया है। इस गाने में शैलेंद्र पटवाल का प्रभावशाली अभिनय चौंकाता है। वह अपने काम से लगातार प्रभावित कर रहे हैं। गंभीर गीत-संगीत के कद्रदानों को यह गीत जरूर पसंद आएगा। आप संबंधित वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल धुन पहाड़ की में देख सकते हैं। इसके लिए लिंक नीचे दिया गया है।

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