उमरिया 18 से कम और मिल गयी सरकारी नौकरी

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चालीस साल की नौकरी के बाद पकड़ा गया झूठ

शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित है शिक्षक

जॉच के बाद शिक्षा विभाग ने कहा, नियमों का हुआ है उल्लंघन

17 साल की उम्र में नौकरी! जांच के बाद कार्रवाई पर नजर

अविकल थपलियाल

कोटद्वार/ देहरादून। चालीस साल बाद शिक्षा विभाग में एक बड़ी गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है। यह सनसनीखेज मामला 2023 में शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक से जुड़ा है।

यूपी के जमाने में उत्तराखण्ड में एक 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गयी। शिक्षा विभाग के नियमों का यह मामला पौड़ी जिले के कोटद्वार का है।
इस मामले की शिकायत पार्षद विपिन डोबरियाल ने की थी। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालक नगर क्षेत्र कोटद्वार में कार्यरत शिक्षक नफीस अहमद की नियुक्ति के संबंध में जांच भी हुई। विभागीय जांच में शिकायत सही पाई गई। और जॉच अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 1985 में नियुक्ति के समय नफ़ीस अहमद की आयु 17 साल 11 महीने व 11 दिन थी। जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के अनुसार नियुक्ति के समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। जांच के बाद पौड़ी के जिला शिक्षाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट देहरादून में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी को भेज दी है।

जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि.) पौड़ी गढ़वाल द्वारा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि संबंधित शिक्षक की नियुक्ति निर्धारित आयु से पहले किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकास खंड दुगड्डा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालक नगर क्षेत्र कोटद्वार में कार्यरत शिक्षक नफीस अहमद की नियुक्ति के संबंध में जांच कराई गई। जांच आख्या में स्पष्ट हुआ कि नियुक्ति के समय उनकी आयु 18 वर्ष से कम थी। अभिलेखों के अनुसार नियुक्ति के समय उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष 7 माह 11 दिन थी, जो नियमों के विरुद्ध है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस मामले में पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके तहत उप शिक्षा अधिकारी दुगड्डा को जांच अधिकारी नामित किया गया था। जांच रिपोर्ट 12 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की गई, जिसमें उक्त तथ्य की पुष्टि हुई।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के अनुसार नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। ऐसे में कम उम्र में की गई यह नियुक्ति नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा से इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने का अनुरोध किया है, ताकि प्रकरण का निस्तारण किया जा सके।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में नियुक्ति प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जांच प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। गौरतलब है कि शिक्षक नफ़ीस अहमद को पुरस्कार भी मिल चुके हैं। अब इस मुद्दे पर बेसिक शिक्षा  निदेशक के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई है।

देखें पत्र

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