बजट सत्र में उत्तराखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट पेश

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विकास दर 7.23 प्रतिशत रहने का अनुमान

आर्थिक सर्वेक्षण में खुली विकास की तस्वीर, प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ा इजाफा

सोलर ऊर्जा, सड़क और बैंकिंग विस्तार से मजबूत हो रही उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था

गरीबी दर घटी, आय बढ़ी: आर्थिक सर्वेक्षण में उत्तराखण्ड की प्रगति के संकेत

तेज रफ्तार से बढ़ रही राज्य की अर्थव्यवस्था

अविकल उत्तराखण्ड

गैरसैंण। उत्तराखण्ड सरकार के अर्थ एवं संख्या निदेशालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही प्रगति और विकास की विस्तृत तस्वीर सामने आई है। सर्वेक्षण के अनुसार पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में करीब डेढ़ गुना बढ़ोतरी हुई है। सरकार का दावा है कि बुनियादी ढांचे के विकास, ऊर्जा, पर्यटन, उद्योग और सेवा क्षेत्र में हो रहे विस्तार के कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2021-22 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.54 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसी प्रकार राज्य की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष 2024-25 में 6.44 प्रतिशत रही, जबकि वर्ष 2025-26 में इसके 7.23 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह वृद्धि राज्य में चल रही विकास योजनाओं, निवेश और आधारभूत संरचना के विस्तार का परिणाम मानी जा रही है।

सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि का उल्लेख किया गया है। वर्ष 2024-25 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2,50,736 रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। यानी प्रति व्यक्ति आय में लगभग 9.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक बताई जा रही है और इसे राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का संकेत माना जा रहा है।

राज्य की अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का विश्लेषण भी सर्वेक्षण में किया गया है। इसमें सेवा क्षेत्र यानी तृतीयक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 50.46 प्रतिशत बताया गया है। इसके बाद द्वितीयक क्षेत्र का योगदान 39.95 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 9.59 प्रतिशत है। सेवा क्षेत्र में विशेष रूप से वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, व्यापार और परिवहन जैसी गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। वित्तीय सेवाओं का योगदान करीब 16 प्रतिशत से अधिक बताया गया है, जो तेजी से बढ़ रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण में सामाजिक विकास के संकेतकों पर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। सर्वे के अनुसार राज्य में बहुआयामी गरीबी दर घटकर लगभग 6.92 प्रतिशत रह गई है। सरकार की विभिन्न सामाजिक योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के कारण गरीब और वंचित वर्गों को राहत मिली है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से जीवन स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।

जल जीवन मिशन के तहत भी राज्य ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 97.86 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट काफी हद तक कम हुआ है और लोगों को बड़ी राहत मिली है।

ऊर्जा क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत जनवरी 2026 तक लगभग 93,901 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 93,789 को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। राज्य में अब तक 59,844 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 217 मेगावाट है। इन सोलर संयंत्रों से उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

कृषि क्षेत्र में भी कई योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 83 हजार से अधिक किसानों का फसल बीमा किया गया है। लगभग 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को बीमा कवरेज में शामिल किया गया है, जिसकी कुल राशि 136 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य में 5.77 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।

मिलेट मिशन के तहत मोटे अनाज के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सहकारी संघ द्वारा 11 हजार से अधिक किसानों से 5,386 मीट्रिक टन मंडुआ की खरीद की गई है, जिसका भुगतान लगभग 26 करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने में मदद मिली है।

बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के विस्तार पर भी सर्वेक्षण में प्रकाश डाला गया है। सितंबर 2025 तक राज्य में कुल 2,622 बैंक शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें लगभग 46 प्रतिशत शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में, 24 प्रतिशत अर्ध-शहरी और 30 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 1,435 शाखाएं हैं, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक की सबसे अधिक 444 शाखाएं शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 2,524 एटीएम भी स्थापित किए गए हैं।

परिवहन और सड़क विकास के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है। राज्य में कुल 3,595 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत 736 किलोमीटर से अधिक लंबाई के 47 कार्यों को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत 10,431 करोड़ रुपये से अधिक है। इस परियोजना के पूरा होने से धार्मिक पर्यटन और आवागमन की सुविधाओं में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार ऊर्जा, कृषि, बैंकिंग, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकास की यही गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होकर देश के तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकती है।

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