वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर

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दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड कारिडोर की हैं तमाम खासियत

12 किलोमीटर लंबा है वाइल्ड लाइफ एलिवेटेड कारिडोर

20 किलोमीटर वन क्षेत्र शामिल है एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में

40 करोड़ के अतिरिक्त बजट से हो रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य

19 प्रतिशत ईंधन की बचत का लगाया गया है अनुमान

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कारिडोर वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा। यही नहीं, इसके निर्माण से मानव-वन्य जीव संघर्ष में कमी की प्रबल संभावना है। इस 12 किलोमीटर लंबे एशिया के संबसे लंबे एलिवेटेड कारिडोर को विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे और उससे जुडे़ वन और वन्य जीवों के विषय को लेकर सोमवार को वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कान्फ्रेंस की। वन मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस कॉरिडोर से वन एवं वन्य जीवों को होने वाले लाभों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
वन मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है। कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया है, जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्य जीव सरंक्षण हेतु इको रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी संपादित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है, जो विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विकसित किया गया है। इसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीवों पास का भी निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं। इसके अंतर्गत साउंड बैरियर एवं लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का न्यूनतम प्रभाव ही पडे़।

वन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान संभव होगा, जो जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि लगभग 60-68 लाख पेड़ों के द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के समान है। साथ ही 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।

वन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्रवास के साथ समय में कमी लाएगी। साथ ही, पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी । प्रेस कान्फ्रेंस में वन विभाग के पीसीसीएफ ( हॉफ ) आर के मिश्रा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

तकनीक ने बचा लिए 33,840 पेड़

-दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ कटने से बच गए। वन मंत्री के अनुसार-इस परियोजना के निर्माण 11,160 पेड़ों को काटना पड़ा, जबकि पूर्व में 45 हजार पेड़ काटे जाने की बात थी।

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