महिला सशक्तिकरण को मिला नया आयाम

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भारत–नेपाल मैत्री बैठक

अविकल उत्तराखण्ड

दार्चुला।भारत एवं नेपाल के मध्य सदियों पुराने “रोटी-बेटी के संबंधों” को और अधिक सशक्त बनाने तथा सीमांत क्षेत्रों की महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को नई दिशा देने के उद्देश्य से नेपाल के दार्चुला में भारत–नेपाल मैत्री बैठक एवं लखपति दीदी सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।
इस अवसर पर दोनों देशों की महिला जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए महिला नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और सीमा पार सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, उत्तराखण्ड की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट के नेतृत्व में उत्तराखण्ड के प्रतिनिधिमंडल ने सहभागिता की।
सम्मेलन में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। भारत और नेपाल की महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों एवं सफल प्रयासों को साझा करते हुए भविष्य में महिला उद्यमिता, प्रशिक्षण एवं आजीविका के क्षेत्र में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “लखपति दीदी” अभियान रहा। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वरोजगार, सूक्ष्म उद्यम, कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, डेयरी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई तथा डिजिटल सेवाओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रतिवर्ष एक लाख रुपये अथवा उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
यह अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज में नेतृत्व की नई पहचान भी प्रदान कर रहा है।
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण, प्रशिक्षण, विपणन सहायता, डिजिटल भुगतान, उत्पाद ब्रांडिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान की जा रही है। आज देशभर में करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।
भारत और नेपाल की महिला प्रतिनिधियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक समानताएं दोनों देशों की मित्रता की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ऐसे आयोजनों से महिलाओं के बीच संवाद, कौशल आदान-प्रदान, आर्थिक साझेदारी तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीमांत क्षेत्रों में महिला उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र नेगी ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच केवल भौगोलिक सीमाएं ही नहीं, बल्कि सदियों पुराने पारिवारिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध भी हैं। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता इन संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी तथा सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।
उत्तराखण्ड से सम्मेलन में कमला चुफाल, लक्ष्मी मेहता, शकुंतला अगारी, सीमा रोकली, राधा बिष्ट, राधा मर्तोलिया, तुलसी, लक्ष्मी परमार, इंद्रा देवी, मनीष नवीन सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नेपाल की महिला प्रतिनिधियों ने सभी भारतीय अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए दोनों देशों की मित्रता को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संकल्प व्यक्त किया।

अपने पिथौरागढ़ जिला प्रवास के दौरान प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने सीमांत क्षेत्र के रंग संग्रहालय में रंग समुदाय की मातृशक्ति से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचय प्राप्त करते हुए उनकी पारंपरिक वेशभूषा ‘चुंग बाला’, ‘रकलच जोजगा’ एवं ‘राकलची’ धारण की तथा ‘बांगच’, ‘चन्द्रहार’, ‘बहा’ और ‘बिराबली बालडंग’ जैसे पारंपरिक आभूषण भी पहने।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, परंपराएं और जनजातीय विरासत हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का दायित्व है। मातृशक्ति हमारी संस्कृति की सबसे सशक्त संवाहक है और उसका सम्मान ही हमारी पहचान एवं गौरव का आधार है।

इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री श्रीमती रश्मि रस्तोगी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती कमला चुफाल, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी मेहता तथा प्रदेश कार्यालय सह-प्रभारी श्रीमती बबली चौहान सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में भी भारत और नेपाल की महिलाओं के बीच संवाद, प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों के अनुभवों का आदान-प्रदान तथा महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों की मातृशक्ति आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।

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